date_range 14 Aug, 2020

पांच वक्त की नमाज पढ़ने के बाद घर मे गाती है भजन,सांप्रदायिक सौहार्द की मिस


पांच वक्त की नमाज पढ़ने के बाद घर मे गाती है भजन,सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बनी है मुस्लिम बेटी

शाहजहांपुर। राम मंदिर हो या फिर सीएए और एनआरसी इन मुद्दों को नेताओं ने अपने फायदे को लेकर हिंदू और मुस्लिम के बीच बङी खाई पैदा कर दी है। लेकिन यूपी के शाहजहांपुर में एक ऐसी बेटी भी है। जो इस खाई को खत्म करने की कोशिश कर रही है। ऐसी बेटी जिसकी सुबह होते ही सर सज्दे मे होता है उसके बाद कुरान पङती है। लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि वही घर के अंदर भजन भी गाती है। इतना ही नही भजन गाने का सिलसिला लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। वही बेटी अब सिंगर इफतेखार से रोज शाम मे अभ्यास करती है। खास बात ये है कि एक न्यूज चैनल ने इस बेटी को नातिया कलाम पढ़ने पङने पर पहला पुरस्कार भी दिया था। 


थाना सदर बाजार के तारीन जलालनगर मोहलले मे रहने वाले मोहम्मद इकबाल एक छोटी सी पान की दुकान चलाते है। पान की दुकान से होने वाली कमाई से वह अपने परिवार का भरण पोषण करते है। उनकी 19 वर्षिय बेटी आरजू ने अपने पिता जी का नाम जिले से लेकर प्रदेश तक मे रौशन कर दिया है। आरजू वैसे तो सुबह उठने के बाद नमाज पढ़ती है। उसके बाद कुरान की तिलावत भी करती है। लेकिन उसके बाद वह घर के अंदर भजन गाती है। खास बात ये है कि आरजू जब भजन गाती है। तब उसकी खनकती आवाज पूरे घर मे गूंजती है। आरजू के परिवार केे लोग भी आरजू के भजन बहुत ही मन से सुनते है। दिल मे कुरान और नमाज पढ़ने का जज्बे के साथ साथ वह धर्म और जात से ऊपर उठकर हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल बन गई है।


आरजू के पिता मोहम्मद इकबाल बताते है कि बचपन से ही आरजू को गाने सुनने और गाने का बहुत ही शौक रहा है। धीरे धीरे आरजू ने घर मे गाना गुनगुनाना शुरू कर दिया। उसका शौक देखकर उसको परिवार के सभी लोगों ने हौसला अफजाई की। जिसके बाद आरजू ने मोहल्ले मे घरों मे होने वाले नातिया कलाम पङना शुरू कर दिया। मोहल्ले की सभी महिलाएं भी आरजू की आवाज की दिवानी हो गई।


मिलाद शरीफ पढ़ते वक्त आरजू का सामना शाहजहांपुर मे मशहूर सिंगर इफतेखार से हुइ। उन्होंने आरजू को और आगे बढ़कर कुछ अलग करने का हौसला दिया। तभी आरजू को उस्ताद इफतेखार ने अभ्यास कराना शुरू किया। तब आरजू ने सबसे पहले भजन गाने का मन बनाया। आरजू रोज शाम मे अपने उस्ताद के बाद भजन गाना सीखती थी और सुबह मे नमाज और कुरान की तिलावत के बाद घर मे भजन गाती है। आरजू को करीब दस भजन जबानी याद है।


आरजू का कहना है कि वह पांच वक्त की नमाज पढ़ती है और कुरान भी पङती है। लेकिन इसके साथ साथ वह भजन गाने का बेहद शौक है। मेरे आगे कभी भी मेरा धर्म आङे नही आता है। क्योंकि हमारे परिवार वाले सभी हमारा साथ देते है। उनका कहना है कि लोग धर्म के नाम पर हिंदू मुस्लिम के बीच खाई पैदा कर रहे हैं।


आरजू ने पहले हारमोनियम पर पकड़ बनाई। फिर पहली बार किशोर अवार्ड के जरिए मंच तक पहुंची। मंच के सामने बैठी भीड़ को देखकर पैर कांपे, पर खुद को संभाला। फस्र्ट टाइम में दूसरा स्थान हासिल हुआ। उसके बाद अपनी आवाज से पहला पुरस्कार प्राप्त कर किशोर अवार्ड की विजेता बनी। वहीं शाहजहांपुर के तारीन जलालनगर में आरजू कृष्ण भजन गाकर लोगों को हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश दे रही है। आरजू का सबसे पसंदीदा भजन मोहे रंग दो लाल है। एमए पास आरजू को एक न्यूज चैनल ने नातिया कलाम में पहला पुरस्कार दिया था।

Write your comment

add