date_range 21 Jan, 2020

कोलकाता की आलू बरियानी क्यों हैं खास जानिए इसके पीछे का राज


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चलों उस मोहब्बत को आग लगाया जाए उसी आग पर बिरयानी बनाई जाएं ....वहां.. किसी ने क्या खुब लिखा हैं जी हां बिरयानी सुनतें ही हम सब के मुंह में एक बार पानी जरुर आता हैं और बिरयानी lovers इसके जायके के लिए हर गली और मौहल्लें में जरुर पहुंच जातें हैं तो अब हम आपको बिरायानी के कुछ ऐसे ही रहस्य के बारें में बताने जा रहें हैं जो आपने शायद कभी सुनी ही न हो

आप में से किसी ने कोलकाता की आलू बिरयानी खाई हैं जी हां यह एक ऐसी बिरयानी हैं जो सभी बिरयानीयो पर भारी पड़ती हैं वही हर किसी न किसी चीज के पिछे का कारण जरुर होता है और कोलकता की आलू बिरयानी का भी एक कारण हैं तो चलिए इसके बारें में हम आपको बतातें हैं
दरअसल, 13 मई, 1956 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अवध के नवाब वाजिद अली शाह को उनकी रियासत से बेदख़ल कर दिया गया था. इसके बाद उन्हें कोलकाता से चार किलोमीटर दूर 'गार्डन रीच' नाम की जगह पर रहने के लिये जगह दी गई थी. इस दौरान वाजिद अली शाह के साथ लखनऊ से लगभग 7 हज़ार लोग भी यहां आये थे.

अवध के नवाब जब कोलकाता आये तो अंग्रेज़ शासकों ने उनको सिर्फ़ एक लाख रुपये महीने की पेंशन की मंज़ूरी दी थी. वही वाजिद अली शाह कुछ समय बाद आर्थिक तंगी से जूझने लगे, इसका पहला असर उनके खान–पान पर पड़ा.
इस बीच नवाब साहब की इतनी हैसियत भी नहीं बची थी कि वो अपने लंबे चौड़े कुन्बे के लिये रोज़ाना इतने सारे गोश्त का इंतज़ाम कर सकें. तब नवाब साहब की ओर से बावर्चियों को हिदायत दी गयी कि वो ऐसा तरीका निकाले, जिससे कि बिरयानी में गोश्त कम लगे और उसका टेस्ट भी बना रहे.

उस वक्त बावर्चियों ने एक तरकीब सुझाई की बिरयानी बनाने के लिए गोश्त की जगह आलुओं का प्रयोग करना शुरू किया. बिरयानी में आलू डालने के लिए पहले पूरे आलू को छीला जाता था, फिर उसमें छेद किये जाते थे. उसके बाद इन्हें तेज़ गर्म घी में आधा मिनट तला जाता था. तले हुए आलुओं को उबलते हुये नमकीन पानी में तब तक पकाया जाता था, जब तक कि वो पूरी तरह से पक न जाएं. इसके बाद आलुओं को हल्का सुनहरा रंग देने के लिये उनके ऊपर केसर डाल दी जाती थी.

बस फिर क्या था, लोगों को ये आलू बिरयानी पसंद आने लगी और धीरे-धीरे ये लोगों के बीच लोकप्रिय हो गई. और आज आलम ये है कि लोग इस बिरयानी के दीवाने हैं.इस बिरयानी की सबसे ख़ास बात इसकी सामग्री और मसाले हैं, जो इस पकवान का स्‍वाद दोगुना कर देते हैं. इसमें इलायची, दालचीनी और लौंग का अलग-अलग फ़्लेवर देकर बिरयानी तैयार की जाती है. वहीं चावल में गुलाब जल और केसर का फ़्लेवर दिया जाता है. कोलकाता की आलू बिरयानी का स्‍वाद और रंग दोनों ही अनोखे हैं. कोलकाता में पार्क स्‍ट्रीट, सॉल्‍ट लेक और लेक गार्डन आदि जगहों की आलू बिरयानी बेहद फ़ेमस है.

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