date_range 24 Feb, 2020

"बस इतनी ही कहानी थी मेरी. एक बैट्समैन, जो नॉन स्ट्राइकिंग एन्ड पर खड़ा था.


"बस इतनी ही कहानी थी मेरी.
एक बैट्समैन, जो नॉन स्ट्राइकिंग एन्ड पर खड़ा था. एक कुछ फैन्स, जो अब भी इस उम्मीद में थे कि शायद वो पुराना वाला धोनी फिर जाग पड़े. एक विराट था, जो पागल था...और एक टीम थी, जिसने अपना सबकुछ हार दिया था मुझपे.
ओवर्स थे, विकेट्स थे, हिट करने की पावर थी...और एक हमारा फॉर्म था, जो हमें छोड़ चुका था..
ये मेरा बैट, जिसमें अब भी आग बाक़ी थी.

हम हिट कर सकते थे, पर किसके लिए...हम चेस कर सकते थे, पर किसके लिए...
मेरा स्ट्राइक रेट, मेरा एवरेज़, मेरी चेसिंग एबिलिटी सब मुझसे छूट रहा था.
मेरे रनों की भूख या तो मुझे ज़िंदा कर सकती थी या फिर, मुझे मार सकती थी.
पर साला अब पीटे कौन, कौन फिरसे मेहनत करे फिनिश कर जाने को. ओवर दर ओवर छक्के लगाने को.
अबे कोई तो आवाज़ देके रोक लो.
ये जो डाई हार्ड फैन्स मुर्दा सी आँखें लिए बैठे हैं घर में, आज भी 'धोनी धागा खोल दे'' बोल दें तो महादेव की क़सम वापस आ जाएं.

पर नहीं, अब साला मूड नहीं. आंखें मूंद लेने में ही सुख है. टुक-टुक करके खेल लेने में ही भलाई है.
पर आएँगे किसी दिन, उन्हीं IPL ग्राउंड्स में, उन्हीं चेन्नई क्राउड के बीच हेलीकॉप्टर उड़ाने को...उन्हीं अंतिम ओवरों में 26-27 मार जाने को...किसी लास्ट बाल पर फिर मैच जिता जाने को."

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