date_range 25 Aug, 2019

जाट लैंड हरियाणा में बड़ा हुआ मुख्यमंत्री मनोहरलाल का कद हरियाणा में पीएम म


जाट लैंड हरियाणा में बड़ा हुआ मुख्यमंत्री मनोहरलाल का कद
हरियाणा में पीएम मोदी फैक्टर के साथ-साथ मनोहर फैक्टर की भी चर्चा शुरू
स्व. भजनलाल के बाद मनोहरलाल बने गैर जाट का एक बड़ा चेहरा
बरसों तक संघ प्रचारक के बाद अब मनोहरलाल ने राजनीति में मनवाया लोहा

चंडीगढ़। बरसों तक संघ के प्रचारक रहने के बाद महज पांच साल पहले सक्रिय राजनीति में उतरते ही मुख्यमंत्री जैसा पद हासिल करने वाले मनोहरलाल का कद सियासत में बड़ गया है। जाट लैंड हरियाणा में बीजेपी द्वारा लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन दिखाए जाने के साथ सियासी गलियारों में मनोहरलाल फैक्टर की भी चर्चा शुरू हो गई है। उनके वफादार लोकसभा चुनाव में मोदी फैक्टर के साथ-साथ मनोहर फैक्टर को भी जीत का बड़ा कारण गिना रहे हैं। यहां तक दावा किया जा रहा है कि साढ़े चार पहले हरियाणा में मनोहरलाल की मार्फत जिस तरह लाल युग की वापसी हुई थी अब उसका स्वरूप और ज्यादा बड़ा हो गया है। मनोहरलाल ने इस जाट बाहुल्य प्रदेश में उस गैर जाट की राजनीति की कमान संभाल ली है जो स्व. भजनलाल के बाद लंबे समय तक खाली थी और इस काम में जाट समेत पूरी 36 बिरादरी एक ताकत बनकर साथ खड़ी हो गई हैं।
राजनीतिक माहिरों का आकलन है कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल पंजाबी समुदाय से हैं और इस बार जिस तरह के रुझान लोकसभा चुनाव में देखने को मिला, उससे साफ संकेत है कि मनोहरलाल 27 फीसदी जाट समुदाय के भीतर बीजेपी का विश्वास स्थापित करने में कामयाब रहे। उल्लेखऩीय है कि गैर जाटों की बात करें तो हरियाणा में ब्राह्मण, वैश्य और पंजाबी समुदाय की जनसंख्या क्रमश: 8 फीसदी, 6 फीसदी और 8 फीसदी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान परिस्थितियों ने भी बीजेपी की तरफ गैर जाट वोट को घुमा दिया। 
विशेषज्ञ इस मामले में हाल में जींद विधानसभा उपचुनाव और स्थानीय स्तर के पंचायतों तथा निगमों के चुनाव में मनोहरलाल की सफलताओं का उदाहरण पेश करते हुए याद दिलाते हैं कि पानीपत और करनाल जैसी जगहों पर साफ तौर पर मनोहरलाल (पंजाबी फैक्टर) असरदार दिखा था।
हरियाणा में जाट बनाम गैर जाट राजनीति के नेतृत्व पर गौर करें तो हरियाणा की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले स्व. भजनलाल ही एकमात्र गैर जाट नेता थे जिन्होंने प्रदेश की सत्ता पर सबसे लंबा समय बिताया और अब उनके बाद मनोहरलाल एकमात्र गैर जाट नेता हैं जिनके नेतृत्व में हरियाणा में बीजेपी की सरकार बिना किसी बड़ी चुनौती के पांच साल निकालने में कामयाब हो गई। राजनीतिक माहिरों का यह भी कहना है कि मौजूदा सियासी परिस्थितियों में एक बार फिर बीजेपी मनोहरलाल की अगुवाई में बेहद सुरक्षित स्थिति में पहुंच गई है।
साफ है कि ऐसी सूरत में बीजेपी एक बार फिर मुख्यमंत्री मनोहरलाल की अगुवाई में ही विधानसभा चुनावों में उतरेगी और तब तक प्रदेश में वे एक सबसे बड़े गैर जाट नेता के तौर पर खुद को तेजी से स्थापित करते हुए नजर आ सकते हैं।
लोकसभा चुनाव नतीजों से गद्गद् मुख्यमंत्री मनोहरलाल हालांकि इस जीत का श्रेय राष्ट्रीय नेतृत्व, पार्टी की राष्ट्रवाद की विचारधारा और नीतियों को दे रहे हैं। चुनाव नतीजों में मोदी फैक्टर के साथ-साथ मनोहरलाल फैक्टर के मुद्दे पर वे एक कुशल राजनेता की तरह इसका विश्लेषण दूसरों पर छोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में बीजेपी ने सबका साथ-सबका विकास को अपना कर काम किया।

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