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पांच दशक बाद ढह गया भजन लाल का गढ़ -भव्य बिश्नोई ने भुगता कुलदीप की निष्क्र


पांच दशक बाद ढह गया भजन लाल का गढ़
-भव्य बिश्नोई ने भुगता कुलदीप की निष्क्रियता का खामियाजा
-परंपरागत आदमपुर सीट से भी हारे कांग्रेस प्रत्याशी
चंडीगढ़। हरियाणा में गैर जाट नेता के रूप में प्रसिद्ध स्वर्गीय चौधरी भजन लाल का गढ़ कहा जाने वाला आदमपुर का किला भी लोकसभा चुनाव में ढह गया है। जिस विधानसभा क्षेत्र को भजन परिवार का अपना क्षेत्र माना जाता था इसके मतदाताओं ने भी इस चुनाव में भजन परिवार को खारिज कर दिया।
हिसार लोकसभा सीट को स्वर्गीय भजनलाल परिवार के कब्जे वाली सीट माना जाता रहा है। हालांकि भजन लाल की मृत्यु के बाद यह राजनीतिक किला लगातार क्षीण होता जा रहा था। जिसका इस लोकसभा चुनाव में पूरी तरह से विनाश हो गया है। हिसार लोकसभा सीट से जहां चौधरी भजन लाल तथा कुलदीप बिश्नोई खुद सांसद रह चुके हैं वहीं आदमपुर विधानसभा क्षेत्र ऐसे इलाका है जहां के बारे में शुरू से यह प्रचलित है कि यहां से भजन परिवार का कोई भी व्यक्ति चुनाव लड़े तो घर बैठे ही जीत जाता है।
वर्ष 1965 में भजनलाल ने पहली बार आदमपुर से ब्लॉक समीति के चेयरमैन बनकर राजनीतिक जीवन में एंट्री की थी। वर्ष 1968 में भजनलाल पहली बार आदमपुर विधानसभा से विधायक चुने गए। विधायक से लेकर 28 जून 1979 को मुख्यमंत्री बनने तक का सफर भजनलाल ने आदमपुर वासियों के साथ ही तय किया। भजनलाल के मुख्यमंत्री रहते हुए एक समय ऐसा भी आया था जब नौकरी हासिल करने के लिए एक व्यक्ति ने खुद को झूठे से आदमपुर का निवासी बता दिया था और भजनलाल ने भरी सभा में उसका झूठ पकड़कर कहा था कि आदमपुर में बच्चा पैदा होने के बाद अस्पताल के रजिस्टर में बाद में दर्ज होता है भजन लाल के रजिस्टर में पहले दर्ज होता है।
इसके बाद भजन लाल ने अपने जीवन के कई चुनाव आदमपुर से लड़े और जीतते रहे। भजनलाल की मृत्यु के बाद भी आदमपुर के लोगों ने भजन परिवार को सर-आंखों पर बिठाकर रखा। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान कुलदीप बिश्नोई ने लोकसभा चुनाव लड़ा। हालांकि कुलदीप बिश्नोई को इनेलो के दुष्यंत चौटाला से हार का सामना करना पड़ा लेकिन तब भी आदमपुर समेत सभी छह विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने जीत दर्ज की थी। इसके उलट इस बार भव्य बिश्नोई को अपने पुश्तैनी विधानसभा क्षेत्र से ही हार का सामना करना पड़ गया। आदमपुर विधानसभा क्षेत्र से  भाजपा के बृजेंद्र सिंह को 59 हजार 122 वोट मिले वहीं कांग्रेस के भव्य बिश्नोई को 35 हजार 895 तथा जननायक जनता पार्टी के दुष्यंत चौटाला को 20 हजार 101 वोट मिले हैं, जबकि आदमपुर से इनेलो महज तीन अंकों में ही सिमट गई है। भव्य बिश्नोई को अपने पुश्तैनी विधानसभा क्षेत्र से मिली हार का सबसे बड़ा कारण उनके पिता कुलदीप बिश्नोई की पिछले चार साल से निष् िक्रयता और कांग्रेस के प्रति विश्वसनीयता का अभाव है।
कुलदीप बिश्नोई के लिए यह चर्चित है कि वह खास मौकों को छोड़कर कभी भी आदमपुर वासियों के लिए उपलब्ध नहीं रहते हैं जबकि उनके पिता भजन लाल ने मुख्यमंत्री रहते हुए भी साफ निर्देश दे रखे थे कि आदमपुर का कोई भी व्यक्ति उनसे मिले बगैर और खाना खाए बगैर नहीं जाएगा। दूसरा कुलदीप बिश्नोई की राजनीति फील्ड के बजाय एसी कमरों तक सिमटी हुई है। इसके चलते आदमपुर के लोगों ने पचास साल में पहली बार भजन लाल परिवार को नकार दिया है।

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