date_range 09 Dec, 2019

पिता :- कन्यादान नहीं करूंगा जाओ , मैं नहीं मानता इसे , क्


पिता :- कन्यादान नहीं करूंगा जाओ ,
मैं नहीं मानता इसे ,
क्योंकि मेरी बेटी कोई चीज़ नहीं ,जिसको दान में दे दूँ ;
मैं बांधता हूँ बेटी तुम्हें एक पवित्र बंधन में ,
पति के साथ मिलकर निभाना तुम ,
मैं तुम्हें अलविदा नहीं कह रहा ,
आज से तुम्हारे दो घर ,जब जी चाहे आना तुम ,
जहाँ जा रही हो ,खूब प्यार बरसाना तुम ,
सब को अपना बनाना तुम ,पर कभी भी
न मर मर के जीना ,न जी जी के मरना तुम ,
तुम अन्नपूर्णा , शक्ति , रति सब तुम ,
ज़िंदगी को भरपूर जीना तुम ,
न तुम बेचारी , न अबला ,
खुद को असहाय कभी न समझना तुम ,
मैं दान नहीं कर रहा तुम्हें ,
मोहब्बत के एक और बंधन में बाँध रहा हूँ ,
उसे बखूबी निभाना तुम .................

एक नयी सोच एक नयी पहल सभी बेटियां के लिए
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बोये जाते हैं बेटे..
पर उग जाती हैं
बेटियाँ..

खाद पानी बेटों को..
पर लहराती हैं बेटियां.

स्कूल जाते हैं बेटे..
पर पढ़ जाती हैं
बेटियां..

मेहनत करते हैं बेटे..
पर अव्वल आती हैं
बेटियां..

रुलाते हैं जब खूब बेटे.
तब हंसाती हैं बेटियां.

नाम करें न करें बेटे..
पर नाम कमाती हैं
बेटियां..

जब दर्द देते हैं बेटे...
तब मरहम लगाती
हैं बेटियां..

छोड़ जाते हैं जब बेटे..
तो काम आती हैं
बेटियां..

आशा रहती है बेटों से.
पर पूर्ण करती हैं
बेटियां..

हजारों फरमाइश से
भरे हैं बेटे....
पर समय की नज़ाकत
को समझती बेटियां..
बेटी को चांद जैसा
मत बनाओ कि हर
कोई घूर घूर कर देखे..

लेकिन
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बेटी को सूरज जैसा
बनाओ ताकि घूरने से
पहले सब की नजर झुक
जाये..
Instafeed wishes all
Happy Daughter's Week !

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Ashwani kumar 04/01/2019 06:20 AM

Outstanding & Perfectly True views about Daughters.
Happy Daughters Week

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Venus Rohilla 04/01/2019 05:13 AM

nice poetry


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