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15000 प्लास्टिक बोतलों से बंग्लों की काण्डी गाँव में बनी मनमोहक वॉल आफ होप


15000 प्लास्टिक बोतलों से बंग्लों की काण्डी गाँव में बनी मनमोहक वॉल आफ होप
अजय रमोला
मसूरी 18 जून
केम्पटी फाल्स के पास बंग्लों की काण्डी गाँव में 15000 प्लास्टिक की बोतलों से निर्मित एक विशाल वॉल आफ होप का गांव की सरपंच ने मंगलवार को विधिवत उध्गाटन किया ।
इस मौके पर विश्व विख्यात सितार वादक सुरमणि अग्नि वर्मा ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति देकर सब का मन मोह लिया।
इस अद्भुत कलाकृति को म्यूज़ियम ऑफ गोवा की ओर से श्री सुबोध केरकर जी ने डिजाइन किया है । उनके अनुसार ये कलाकृति हवा और पानी से खराब नही होगी औऱ उम्मीद है कि लम्बे समय तक लोगों को प्रेरित करती रहेगी।
मसूरी के युवाओं और बंग्लों की काण्डी गाँव के लोगो के साझा प्रयास से बनी इस दीवार काँड़ी गाँव की सरपंच श्रना राँगड, नेस्ले के प्रतिनिधि, विभिन्न स्कूलों के वालन्टियर्स और गाँव के लोगो के प्रज्वलित कर किया गया।
प्रोजेक्ट डाइरेक्टर अरविंद शुक्ल ने बताया की १५०० फ़ीट लम्बी यह दीवार 15000 प्लास्टिक बोतलों को मसूरी और आसपास के क्षेत्र में विभिन्न स्रोतों से एकत्र कर बनाई गयी है ताकि पर्यटकों को कूड़ा निष्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
गोवा के संग्रहालय के संस्थापक सुबोध केरकर की दीवार मसूरी में स्कूलों और कॉलेजों से 50 से अधिक स्वयंसेवकों की मदद से बनाया गया है, और 'Banglow Ki Kandi' गांव की महिलाओं ने अपने इन्हें काटने और पेंट का काम है ।
शुक्ला ने मसूरी को स्वच्छ रखने की दिशा में काम करने में होटल एवं और रेस्तरां मालिकों का समेत कूड़ा उठाने वाले स्वयं सेवकों का धन्यवाद किया।
यह हिल्दारी परियोजना का एक हिस्सा है जो प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और एक प्लास्टिक अपशिष्ट मुक्त वातावरण बनाने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए काम कर रही है.
सुबोध केरकर के अनुसार, "इसकी स्थापना स्टील के खंभों को दो फ़ीट तक गाड़कर से संरचनात्मक तरीके से आकर्षक रूप दिया गया है और यह संरचना पूरी तरह से बारिश और हवा का सामना करने में सक्षम है.
नेस्ले इंडिया के कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक संजय खजुरिया ने कहा, "यह उम्मीद की दीवार अपसाइकिलिंग के माध्यम से प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो प्लास्टिक के पानी की बोतलों का पुन: उपयोग करने का एक रचनात्मक तरीका है। उन्होनें का दीवार के माध्यम से, हमारा प्रयास 'लिटर फ्री हिल्स' का का संदेश कला का उपयोग से देने का है।
बंगलो की कंडी की सरपंच रीना रांगड़ ने कहा, "इसके द्वारा, इस क्षेत्र में अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा, साथ ही कचरे के जिम्मेदार हैंडलिंग का संदेश भी दिया जाएगा। मुझे आशा है कि यह परियोजना प्लास्टिक के रीसाइक्लिंग को प्रेरित करेगी और क्षेत्र के लोगों की आर्थिक भलाई में योगदान देगी।
सी. पी. सी. बी. की रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष करीब 6,60,787 टन प्लास्टिक का कूड़ा बनता है जिसमें से अस्सी प्रतिशत लैंडफिल या जल संसाधनों में बिना प्रोसेस किए मिल जाता है । नेस्ले इंडिया और रीसिटी नेटवर्क द्वारा हिलदारी आन्दोलन चलाया जा रहा है इस सन्देश को जन जन तक फैलाने की लिए किया जा रहा है।

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