सुखद सूचना: शुक्र ग्रह पर है जीवन, वैज्ञानिकों को मिले बादल में ऐसे संकेत

हालांकि ये सच है कि फॉस्फीन एक ऐसी गैस है जो सिर्फ बायोलॉजिकल प्रक्रिया से ही उत्पन्न होती है। उसे रासायनिक क्रिया द्वारा उत्पन्न नहीं किया जा सकता न ही प्राकर्तिक तरीके से उत्पन्न होती है।

सुखद सूचना: शुक्र ग्रह पर है जीवन, वैज्ञानिकों को मिले बादल में ऐसे संकेत
symbolic image (credit: facebook)

दुनिया भर के वैज्ञानिक मानव जीवन को और बेहतर बनाने के लिए हमेशा किसी न किसी खोज में लगे रहते हैं। किसी दूसरे ग्रह पर भी पृथ्वी की तरह जीवन है या नहीं इस बात की खोज वर्षों से जारी है। इसी खोज से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली खबर आई है। आपको जानकर हैरानी होगी कि एस्ट्रोनॉट्स ने एक नई जानकारी हासिल की है। एस्ट्रोनॉट्स के मुताबिक अंतरिक्ष में पृथ्वी के नज़दीक वीनस यानि शुक्र ग्रह के वातावरण में फोस्फीन गैस मौजूद है।


बता दें कि सोमवार को एस्ट्रोनॉट्स की अंतराष्ट्रीय टीम ने वीनस ग्रह के वातावरण में फॉस्फीन गैस की उपस्तिथि के बारे में जानकारी देकर लोगों में एक उत्साह पैदा कर दिया है। उन्होंने बताया कि वीनस पर जीवन की उम्मीद है। फॉस्फीन एक रंगहीन लेकिन बदबूदार गैसहै। ये केवल बैक्टीरिया की कुछ ही प्रजातियों द्वारा बनाई जाती है जो ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में भी जीवित रहती हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक वीनस पर लगभग 20 पार्ट प्रति बिलियन के हिसाब से फोस्फीन गैस के ट्रेसेस मिले हैं। जो हमारी उम्मीद से हज़ार गुना ज्यादा है।


क्या वीनस पर जीवन है?

ये वाकई एक बहुत बड़ा सवाल है कि क्या शुक्र यानि वीनस ग्रह पर जीवन है। तो हम आपको बता दें कि अभी तक वैज्ञानिकों ने इस बात पर कोई सहमति नहीं जताई है न ही कोई जानकारी दी है। हालांकि ये सच है कि फॉस्फीन एक ऐसी गैस है जो सिर्फ बायोलॉजिकल प्रक्रिया से ही उत्पन्न होती है। उसे रासायनिक क्रिया द्वारा उत्पन्न नहीं किया जा सकता न ही प्राकर्तिक तरीके से उत्पन्न होती है। लेकिन फिर भी इस गैस के पाए जाने पर ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि ये ज्वालामुखी या उल्कापिंडो कुछ अन्य तरीके हैं जिससे इसका उत्पादन हो सकता है। 

जानकारी के मुताबिक यह खोज 2017 में ही हो गई थी लेकिन वैज्ञानिकों ने इसकी सार्वजानिक घोषणा से पहले तीन वर्षों में अपने डेटा की दोबारा जांच की।

अभी तक हुई खोज में ये सामने आया फॉस्फीन की उत्पत्ति का एकमात्र जरिया है और वो है जैविक प्रक्रिया, और यह उसी तरह उत्पन्न हुआ है जिस तरह से यह कुछ सूक्ष्म जीवाणुओं द्वारा पृथ्वी पर उत्पन्न होता है।

लेकिन फिर भी सोमवार को घोषणा करने के दौरान, वैज्ञानिकों ने बहुत सावधानी बरती और बार-बार इस बात पर जोर दिया कि यह खोज इस बात की पुष्टि नहीं करती कि शुक्र पर जीवन है।


क्यों है महत्वपूर्ण?

लगातार वज्ञानिकों द्वारा की जा रही अभी तक कि खोजों में पृथ्वी से दूर जीवन की संभावना है यह अभी तक का सबसे विश्वसनीय प्रमाण है। वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा या मंगल ग्रह पर हुई पानी की खोज की तुलना में यह ज्यादा महत्वपूर्ण खोज है।

 IISER कोलकाता के दिब्येंदु नंदी ने कहा,“जीवन की खोज में यह सबसे बड़ी खोज है, इसमें कोई शक नहीं है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं निकाला जा सकता कि शुक्र पर जीवन है या किसी और जगह है लेकिन अगर आप एक वैज्ञानिक हैं जो अन्य ग्रहों पर जीवन की तलाश कर रहे हैं, तो मुझे लगता है कि यह आपकी पहली वास्तविक सफलता है।”

इसी तरह और भी दूसरे लोगों ने इस खोज को बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण खोज बताया है। इससे इस बात की पुष्टि भले ही न हो कि वीनस पर जीवन है या नहीं लेकिन  उम्मीद फिर भी जताई जा सकती है।


शुक्र पर जीवन संभव नहीं

ऐसा हम नहीं बल्कि वैज्ञानिकों का कहना है उन्होंने कहा कि शुक्र के बारे में ऐसी बहुत सी बातें हैं जो इस तरफ इशारा करती है कि शुक्र पर जीवन संभव नहीं है, जैसे कि हम सभी जानते हैं कि शुक्र का तापमान बहुत ज्यादा है और  उसका वातावरण जरूरत से ज्यादा अम्लीय है, बस यही दो चीजें हैं जो शुक्र पर जीवन को असंभव बना देती हैं।

इस खोज को लेकर वैज्ञानिकों का बस इतना कहना है कि फॉस्फीन की उपस्तिथि से एक उम्मीद जगी है लेकिन कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। अब हम उत्साह के साथ उन सवालों के जवाब ढूंढ़ने में जुट गए हैं।


शुक्र मिशन पर क्या पड़ सकता है असर?

इस खोज से शुक्र मिशन में वैज्ञानिकों की रूचि और तेज़ हो गई है। शुक्र के लिए मिशन कोई नई बात नहीं है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भी निकट भविष्य में शुक्राण्यन कहे जाने वाले शुक्र को एक मिशन की योजना बना रहा है। अब तक, यह योजना सिर्फ ड्राइंग बोर्ड पर ही है। अब शुक्र के सभी मिशनों को जीवन की उपस्थिति के और सबूतों की जांच करने के लिए तैयार किया जाएगा।