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Proded by Prof Ashwani Rupi here is an attempt at tukbandi:Trigun Sharma


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कहीं ना कहीं कर्मों का डर है !
नहीं तो गंगा पर इतनी भीड़ क्यों है?

जो कर्म को समझता है उसे
धर्म को समझने की जरुरत ही नहीं

पाप शरीर नहीं करता विचार करते है

और गंगा विचारों को नहीं !
सिर्फ शरीर को धोती है |

"शब्दों का महत्व तो !
बोलने के भाव से पता चलता है ,

वरना "वेलकम" तो
पायदान पर भी लिखा होता है"।

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FARHEEN NAAZ 03/01/2019 04:25 AM

Wow


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