date_range 24 May, 2019

अंगूर के औषधीय गुण


इसमें विटामिन-सी तथा ग्लूकोज पयाप्त मात्रा में पाया जाता है। यह शरीर में खून की वृद्धि करता है और कमजोरी दूर करता है। यही कारण है कि डॉक्टर लोग मरीजों को फलों में अंगूर भी खाने की सलाह देते हैं।

अंगूर का सेवन, आंत, लीवर व पचान संबंधी अन्य रोगों, मुंह में कड़वापन रहना, खून की उल्टी होना, गुर्दे की कार्यक्षमता में कमी, कब्जियत, मूत्र की बामारी, अतिसार कृमि रोग, टीबी (क्षय रोग), अम्ल-पित्त, गुल्म रोग (गांठ) और ग्रहणी आदि रोगों में विशेष लाभकारी होता है।

* यदि किसी ने धतूरा खा लिया हो, तो उसे अंगूर का सिरका दूध में मिलाकर पिलाने से काफी लाभ होता है। अंगूर मियादी बुखार, मानसिक परेशानी, पाचन की गड़बड़ी आदि भी काफी लाभकारी है।

* अंगूर में एक विशेष गुण यह भी है कि यह शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को आसानी से शरीर से बाहर निकाल देता है। यह एक अच्छा रक्त शोधक व रक्त विकारों को दूर करने वाला फल है।

* अंगूर रक्त की क्षारीयता सन्तुलित करता है, क्योंकि रक्त में अम्ल व क्षार का अनुपात 20:80 होना चाहिए। यदि किसी कारणवश शरीर में अम्लता बढ़ा जाए, तो वह हानिकारक साबित होता है। अंगूर बढ़ती अम्लता को आसानी से कन्ट्रोल करता है।

* अंगूर का 200 ग्राम रस शरीर को उतनी ही क्षारीयता प्रदान करता है, जितना कि एक किलो 200 ग्राम बाईकार्बोनेट सोडा, हालांकि सोडा इतनी अधिक मात्रा में लिया नहीं जा सकता।

* अंगूर के रस को कलई के बर्तन में पकाकर गाढ़ा करके सोते समय आंखों में लगाने से जाला, फूला आदि नेत्र रोगों दूर हो जाते हैं।

* जिन माताओं को पर्याप्त दूध न उतरता हो, उनके लिए भी इसका सेवन लाभकारी होता है।

* अंगूर की बेल काटने से जो रस निकलता है, वह त्वचा रोगों में लाभकारी होता है।

* अंगूर के पत्तों का अर्क एक से तीन चम्मच तक लेने पर व बावासीर के मस्सों पर लगाने पर काफी लाभ मिलता है। 500 मिलीग्राम से एक ग्राम तक पत्तों की भस्म शहद से लेने से भी बवासीर में लाभ मिलता है।

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