कोरोना के कहर के बीच चीन ने पेश की मिसाल, ऐसे संतुलित की अपनी अर्थव्यवस्था, देखती रही दुनिया

मात्र सात महीनों में यानि जुलाई तक कई हद तक चीज़ों को नियंत्रित कर लिया गया। चीनी सरकार ने व्यापार को समर्थन करने का एक लक्ष्य तैयार किया है।

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कोरोना महामारी  ने सिर्फ़ देश ही नहीं पूरी दुनिया की आर्थिक व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला है। लेकिन जहां दुनिया अभी भी आर्थिक मंदी से गुज़र रहा है वहीं जिस देश ने दुनिया को ये महामरी दी है यानि कि चीन। वो धीरे-धीरे अब वापस अपनी पुरानी स्थिति में आ रहा है। साथ ही दुनिया को भी आर्थिक मंदी से बाहर निकलने में मदद कर रहा है। ताज़ा जानकारी के मुताबिक़ पिछले साल के मुक़ाबले इन्हीं दिनों में चीन की GDP के 5.5% तक की बढ़त की उम्मीद जताई जा रही है।


अब सवाल ये पैदा होता है की आख़िर चीन ऐसा कैसे कर पा रहा है? क्या है चीन कीं तैयारी? किस तरह से काम कर रहा है चीन? ऐसे में आकड़ों पर नज़र डालें तो चीन पर ही वायरस का प्रभाव सबसे पहले हुआ था। लेकिन उसके बाद भी चीन ने बहुत जल्द ही अपनी पुरानी स्थिति में वापस आ गया है। 


बता दें कि चीन ने कोरोना महामारी के बीच जल्दी से सभी चीज़ों को दोबारा खोलना, घर से काम की सुविधा, मैन्युफ़ैक्चरिंग बढ़ाना आदि शुरू किया। उसी का नतीजा है कि मात्र सात महीनों में यानि जुलाई तक कई हद तक चीज़ों को नियंत्रित कर लिया गया। चीनी सरकार ने व्यापार को समर्थन करने का एक लक्ष्य तैयार किया है। बजाय इसके कि महामरी में जो वित्तीय संकट आया है उससे कैसे निपटा जाए।


अंतरराष्ट्रीय मोनेटरी फंड के आंकडों पर ध्यान देने पर पता चला कि पूरी दुनिया में हुई वृद्धि का जो हिस्सा चीन में आना है उसमें 2021 तक 26.8% बढ़ जाएगी और 2025 तक 27.7% तक पहुंच जाएगी। आईएमएफ का मानना है कि चीन के विकास का  सबसे बड़ा कारण यह है कि 2021 के अंत तक ज्यादा होने की उम्मीद है जो कि 2019 के मुकाबले  0.6% ज्यादा है। लेकिन अर्थव्यवस्था सितंबर तक यानि नौ महीनों तक 0.7% बढ़ने की उम्मीद है। जिसकी सरकार को शुरुवात में ही उम्मीद थी।


चीन की आर्थिक व्यवस्था इस पर भी निर्भर करेगी कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव होने के बाद चीन के साथ अमेरिका के संबंध कैसे रहेंगें। अर्थव्यवस्था को जल्दी से पुरानी स्थिति में वापस लाना चीन की के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।

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