आम लोगों के लिए खुला अमृत उद्यान, दिलचस्प है राजसी बगीचे की कहानी

राष्ट्रपति भवन स्थित में अमृत उद्यान 31 जनवरी से आम लोगों के लिए खोल दिया गया है. अमृत उद्यान आकर अब आप रंग-बिरंगे और अनोखी प्रजाति के खूबसूरत फूलों को देख सकते हैं. अमृत बगीचे को देखने के लिए न सिर्फ देश के लोग बल्कि विदेश के लोग भी आते हैं.

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राष्ट्रपति भवन स्थित अमृत उद्यान 31 जनवरी से आम लोगों के लिए खोल दिया गया है. अमृत उद्यान आकर अब आप रंग-बिरंगे और अनोखी प्रजाति के खूबसूरत फूलों को देख सकते हैं. अमृत बगीचे को देखने के लिए न सिर्फ देश के लोग बल्कि विदेश के लोग भी आते हैं. अमृत उद्यान में प्रवेश करने के प्रोसेस को समझने से पहले इसके इतिहास पर नजर डालते है और जानते हैं कि आखिर आज का अमृत गार्डन जो पहले मुगल गार्डन था उसका इतिहास क्या है. इस गार्डन को बनाने का आइडिया किसका था, किसने बनवाया था और इसका नाम मुगल गार्डन क्यों पड़ा था, तो चलिए बारी-बारी से सारे सवालों को देखते हैं.


एडवर्ड लुटियंस ने किया था निर्माण

राष्ट्रपति भवन का डिजाइन बनाने वाले सर एडवर्ड लुटियंस ने ही मुगल गार्डन का निर्माण किया था. इस गार्डन को गणतंत्र का पहला गार्डन भी कहा जाता है. 1920-1930 के दशक में एडवर्ड लुटिंयस ने वायसराय एस्टेट के हिस्से के रूप में इसे तैयार किया था. उन्होंने 330 एकड़ की संपत्ति पर पांच एकड़ से अधिक के घर के साथ वायसराय एस्टेट को बनाया था. जिसे अब राष्ट्रपति भवन कहा जाता है. इस गार्डन में वास्तुकला और बागवानी परंपराओं में अंग्रेजी और मुगल शैली दोनों का समावेश है. 

मुगल गार्डन नाम क्यों पड़ा?

दिल्ली में मुगल बादशाह फिरोज शाह तुगलक ने मुगल परंपराओं के 1,200 गार्डन बनवाए थे. दिल्ली के मुगल गार्डन दशकों तक मुगल शासन के युग और संस्कृति को दर्शाते हैं. बाद में अंग्रेजों ने परंपराओं को अंग्रेजी सौंदर्य शास्त्र के साथ मिला दिया. शालीमार बाग, साहिबाबाद या बेगम बाग जैसे गार्डन भी वनस्पतियों के प्रदर्शन के साथ शक्ति और प्रभुत्व का प्रतीक हैं. सर एडवर्ड लुटियंस ने राजसी बगीचे को डिजाइन करते समय इस्लामी विरासत के साथ ब्रिटिश कौशल को समाहित किया. मुगल गार्डन का डिजाइन ताजमहल के बगीचों, जम्मू और कश्मीर के बगीचों और भारत और फारस के लघु चित्रों से प्रेरित था. इसलिए इसका नाम मुगल गार्डन रखा गया.


अमृत गार्डन की ख़ूबसूरती

अमृत गार्डन दुनिया के तमाम मशहूर फूलों की ख़ूबसूरती और ख़ुशबू से लबरेज़ है. जैसे कि यहां नीदरलैंड के ट्यूलिप हैं. ब्राज़ील के ऑर्किड, जापान के चेरी ब्लॉसम और दूसरे मौसमी फूल, तो चीन के कमल के फूल भी हैं. यहां पर मुग़ल नहरों, चबूतरों और फूलों की झाड़ियों का यूरोप के फूलों, लॉन और एकांत देने वाली बाड़ से बख़ूबी मेल देखने को मिलता है.


मुग़ल गार्डन में 159 तरह के गुलाब

मुग़ल गार्डन के गुलाब यहां की सबसे बड़ी ख़ासियत हैं. यहां ग़ुलाबों की 159 क़िस्में मौजूद हैं. इनमें एडोरा, मृणालिनी, ताज महल, एफिल टॉवर, मॉडर्न आर्ट, ब्लैक लेडी, पैराडाइज़, ब्लू मून और लेडी एक्स शामिल हैं. मुग़ल गार्डन में मशहूर शख़्सियतों जैसे कि मदर टेरेसा, राजा राममोहन राय, जॉन एफ, कैनेडी, महारानी एलिज़ाबेथ, क्रिश्चियन डायोर के नाम के ग़ुलाब भी हैं. बाग़ीचे में महाभारत के किरदार जैसे कि अर्जुन और भीम नाम के फूल भी मिलते हैं. 


मुगल गार्डन में शुरू हुए कई प्रोजेक्ट्स

1998 में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने के आर नारायणन के अनुरोध पर एस्टेट में भूजल बढ़ाने के लिए वर्षा जल को इकठ्ठा करने के लिए एक प्रणाली स्थापित की. 2002 में, अब्दुल कलाम ने आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं में उपयोग किए जाने वाले स्वदेशी पौधों को प्रदर्शित करने वाले जड़ी-बूटियों के बगीचों के साथ संयुक्त औपचारिक उद्यान बनाए. 2008 में, प्रतिभा सिंह पाटिल ने रोशनी नाम की एक परियोजना शुरू की, जिसने एस्टेट को शहरी पारिस्थितिक स्थिरता के लिए एक मॉडल बना दिया. 2015 में, प्रणब मुखर्जी ने बागवानी के लिए सीवेज उपचार सिस्टम स्थापित किया.

गेट नंबर 35 से मिल रहा प्रवेश

राष्ट्रपति भवन ने अमृत उद्यान घूमने वालों के लिए आनलाइन से लेकर आफलाइन टिकट की व्यवस्था की है. राष्ट्रपति भवन के गेट नंबर 35 से प्रवेश दिया जा रहा है. रोजाना 20 गाइड उद्यान में जानकारी देने के लिए मौजूद रहेंगे. यह उद्यान 28 से 31 मार्च तक विशिष्ट श्रेणी के लोगों के लिए खुलेगा। किसानों के लिए 28 मार्च को, दिव्यांगों के लिए 29 सेना व अर्धसैनिक बलों व पुलिसकर्मियों के लिए 30 और 31 मार्च को महिलाओं व स्वयं सहायता समूह की जनजातीय महिलाओं के लिए खुलेगा.

हिंदू महासभा ने की नाम बदलने की मांग

मुग़ल गार्डन का नाम बदलने की मांग हिंदू महासभा ने की थी. 2019 में हिंदू महासभा ने मांग की थी कि मुग़ल गार्डन का नाम बदलकर राजेंद्र प्रसाद उद्यान कर दिया जाए. उस वक़्त ये मांग नहीं मानी गई थी. लेकिन अब दिल्ली की एक पहचान बन चुके मुग़ल गार्डन को नया नाम दे दिया गया है.

कैसे  करें बुकिंग?

अमृत उद्यान घूमने के लिए आपको पहले ही बुकिंग करानी पड़ेगी, देखिए सारा प्रोसेस.

- इसके लिए आप https://rb.nic.in/rbvisit/visit_plan.aspx पर जाएं.

- इसके बाद जो पेज खुलेगा, उसमें Booking for Udyan Utsav 2023 पर क्लिक करें.

- बुक नाउ पर क्लिक करते ही दूसरा पेज खुलेगा. यहां ऑनलाइन बुकिंग ऑप्शन पर क्लिक करें.

- यहां आपको तारीख और गार्डन घूमने का टाइम स्लॉट फील करना होगा.

- सारी डिटेल्स भरने के बाद नेक्स्ट पर क्लिक करें.

- नेक्स्ट पर क्लिक करने के बाद आप दूसरे पेज पर पहुंच जाएंगे.

- यहां विजिटर्स के नाम और मोबाइल नंबर जैसी जो जानकारियां पूछी जाएंगे वो आपको भरनी होंगी.

- मोबाइल नंबर डालते ही फोन पर ओटीपी आएगा. उस ओटीपी को डालकर कैप्चा कोड डालें.

- इसके बाद सब्मिट पर क्लिक करें.

- इसके बाद रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा.

- रजिस्ट्रेशन के बाद फोन पर कंफर्मेशन का मैसेज आ जाएगा.

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