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ज्यादा अंडे खाने से हो सकता है डाइबिटीज और इसकी दवा के अधिक सेवन से फेल हो सकता है हार्ट

वैज्ञानिकों का मानना है कि ज़्यादा अंडा खाने से आपके रक्त में सुगर लेवल बढ़ जाता है। जिस कारण से डायबिटीज का ख़तरा बढ़ जाता है।

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By Anshita Shrivastav | लाइफ स्टाइल - 17 November 2020

अंडे को दुनियाभर में पसंद किया जाता है। इसको बनाने के बहुत से अलग अलग तरीक़े भी है। हर तरीक़े से बनाए जाने पर अंडा स्वादिष्ट लगता है। स्वाद कि साथ साथ अंडा सेहत के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद होता है। क्योंकि उसने खनिज, प्रोटीन, विटामिन सब कुछ पाया जाता है। लेकिन फिर भी इसको लेकर कई लोगों के मन में संदेह है कि इसे खायें या न खायें।

अध्ययनों में बताया गया है कि अंडे खाने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है। इस अध्ययन के बाद ज़्यादातर डॉकटरों ने अंडा न खाने की सलाह देना शुरू कर दिया। लेकिन उसके बाद एक और अध्ययन हुआ जिसके बाद ये पता चला कि अंडे में आहार कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है जिसके कारण से कोलेस्ट्रोल की मात्रा में कोई बढ़ोत्तरी नहीं होती। अगर मक्खन, पनीर आदि के साथ बनाया जाए तो कोलेस्ट्रोल पर फ़र्क़ पड़ता है। 


अब अंडे को लेकर एक नई बहस छिड़ गयी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ज़्यादा अंडा खाने से आपके रक्त में सुगर लेवल बढ़ जाता है। जिस कारण से डायबिटीज का ख़तरा बढ़ जाता है। 

ये अध्ययन 1991 और 2009 के बीच किया गया जिसमें देखा गया जो लोग रोज़ एक या दो अंडे का सेवन करते हैं। यानि प्रतिदिन लगभग 50 ग्राम अंडे ने डायबिटीज का ख़तरा लगभग 60% तक बढ़ता है। इसके अलावा अगर रोज़ 38 ग्राम अंडा भी खाया जाता है तब भी मधुमेह का खतरा लगभग 25% बढ़ जाता है।

अंडे के अन्य नकारात्मक प्रभाव

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, एक दिन में एक अंडा खाना आपके दिल के लिए हानिकारक नहीं है लेकिन ज़्यादा खाना आपके दिल पर प्रभाव डाल सकता है।

एक साथ बहुत सारे अंडे खाने से शरीर में गर्मी पैदा हो सकती है। इससे आपको पाचन सम्बंधित समस्यायें होंगी और गर्मी ज़्यादा बढ़ने से चेहरे पर मुहासे आदि भी हो सकते हैं। इसके अलावा गर्भवती महिला को कभी भी कम पका हुआ अंडा न खिलायें।


शोधकर्ताओं के मुताबिक़ अभी विकसित की गयी डायबिटीज की दवा एम्पाग्लिफ्लोज़िन, डायबिटीज और गैर-मधुमेह दोनों स्थिति में हार्ड फेल का अच्छे से इलाज कर सकती है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के जर्नल में प्रकाशित क्लिनिकल परीक्षण में देखा गया कि यह दवा दिल के आकार और कार्य में सुधार कर सकती है। महत्वपूर्ण रूप से, शोधकर्ताओं ने ध्यान दिया कि दवा गैर-मधुमेह रोगियों में हाइपोग्लाइसीमिया या निम्न रक्त शर्करा का कारण नहीं बनती है।

परीक्षण के लिए, शोधकर्ताओं ने 84 रोगियों को क्रोनिक हार्ट विफलता के साथ भर्ती किया गया। छह महीनों में कुछ छोटी सुरक्षा यात्राओं के साथ मरीजों को छह महीने तक उपचार या प्लेसबो प्राप्त हुआ। छह महीने तक मरीज़ परीक्षणों से गुज़रे।

शोधकर्ताओं ने पाया कि एम्पाग्लिफ्लोज़िन के साथ इलाज किए जाने वाले लगभग 80 प्रतिशत रोगियों में महत्वपूर्ण सुधार हुआ, और उनके दिल सामान्य स्थिति में हो गये। इस समूह में छह महीने के निशान पर बाएं वेंट्रिकुलर इजेक्शन अंश में 16.6 प्रतिशत सुधार हुआ था और उनके दिलों ने मजबूत तरीके से रक्त पंप किया था।

अध्ययन से यह भी पता चला है कि एम्पग्लिफ्लोज़िन लेने वाले रोगियों में उनके व्यायाम के स्तर में लगभग 10 प्रतिशत सुधार हुआ था, जो महत्वपूर्ण अंतर था।

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