date_range 21 Apr, 2019

समझौता ब्लास्ट केस / विशेष अदालत ने असीमानंद समेत सभी चारों आरोपियों को बरी


समझौता ब्लास्ट केस / विशेष अदालत ने असीमानंद समेत सभी चारों आरोपियों को बरी किया

-समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 को पानीपत के पास धमाका हुआ, इसमें 68 की मौत हुई थी

-मामले में पाकिस्तानी नागरिक राहिला वकील ने कुछ और चश्मदीदों के बयान दर्ज करने की अपील की थी, अदालत ने मांग ठुकराई

त्रिगुण शर्मा

पंचकूला।  पानीपत के दीवाना स्टेशन के पास 12 साल पहले हुए समझौता ट्रेन ब्लास्ट मामले में पंचकूला की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने बुधवार को समझौता ब्लास्ट केस में असीमानंद समेत सभी चारों आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने सबूतों के आभाव में मुख्य आरोपी असीमानंद के अलावा लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंद्र चौधरी को भी बरी कर दिया है। अदालत ने इस मामले में 11 मार्च को सुनवाई पूरी कर ली थी। 

इस मामले में फैसला पहले 14 मार्च को आना था, लेकिन पाकिस्तानी नागरिक राहिला वकील ने एक याचिका दायर कर कुछ और चश्मदीदों के बयान रिकॉर्ड करने की अपील की। इस पर अदालत ने कहा कि चश्मदीदों को 6 बार सम्मन भेजे गए, लेकिन वह नहीं आए। अदालत ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया था। एनआईए ने मामले में कुल 224 गवाहों को पेश किया, जबकि बचाव पक्ष ने कोई गवाह नहीं पेश किया।


लाहौर जा रही थी समझौता एक्सप्रेस


दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में 18 फरवरी 2007 को पानीपत के दीवाना रेलवे स्टेशन के पास धमाका हुआ था। इस धमाके में दो बोगियों में आग लग गई थी, जिसमें 68 लोग जिंदा जल गए थे। मरने वालों में ज्यादातार पाकिस्तान के रहने वाले थे। पुलिस को मौके से दो सूटकेस बम मिले, जो फट नहीं पाए थे। ऐसा कहा गया कि दो लोग ट्रेन में दिल्ली से सवार हुए थे और रास्ते में कहीं उतर गए। इसके बाद धमाका हुआ।


इंदौर से गिरफ्तार हुए थे दो संदिग्ध

15 मार्च 2007 को हरियाणा पुलिस ने इंदौर से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। यह इन धमाकों के सिलसिले में की गई पहली गिरफ्तारी थी। पुलिस इन तक सूटकेस के कवर के सहारे पहुंच पाई थी। ये कवर इंदौर के एक बाजार से घटना के चंद दिनों पहले ही खरीदे गए थे। इसके बाद 26 जुलाई 2010 को मामला एनआईए को सौंपा गया था। स्वामी असीमानंद को आरोपी बनाया गया।


2011 में दायर हुई थी पहली चार्जशीट

एनआईए ने 26 जून 2011 को पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। पहली चार्जशीट में नाबा कुमार उर्फ स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, रामचंद्र कालसंग्रा, संदीप डांगे और लोकेश शर्मा का नाम था। आरोपियों पर आईपीसी की धारा ( 302 के साथ पढ़ी जाती 120), 120बी साजिश रचने के साथ 302 हत्या, 307 हत्या की कोशिश करने समेत, विस्फोटक पदार्थ लाने, रेलवे को हुए नुकसान को लेकर कई धाराएं लगाई गई।

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