ज्ञानवापी मामले में बागेश्वर बाबा की भविष्यवाणी, जरूर निकलेंगे शंकर जी

बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी पुस्तक सनातन धर्म का विमोचन किया है। आपको बता दे कि यह पूरा कार्यक्रम दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित किया गया था।

धीरेंद्र शास्त्री
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बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी पुस्तक सनातन धर्म का विमोचन किया है। आपको बता दे कि यह पूरा कार्यक्रम दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित किया गया था। इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने ज्ञानवापी मस्जिद पर दिए गए कोर्ट फैसले को लेकर बड़ा बयान भी दिया है। बाबा धीरेंद्र शास्त्री का यह कहना है कि शंकर जी निकालने हैं यह तय समझिए। इसके अलावा उनका यह भी कहना है की पहली बात तो यह है कि ज्ञानवापी में नंदी भगवान निकल पड़े हैं और दूसरी बात यह है कि कोर्ट की मंशा पर सवाल उठाने का मतलब होगा कि आप उसे कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इसका यह साफ मतलब है कि आपको अपने आप पर भरोसा नहीं है।

बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने की सनातन धर्म की बात

इसके अलावा धीरेंद्र शास्त्री ने तीसरी बात कहते हुए यह बताया है कि ज्ञानवापी को लेकर अदालत की तरफ से जो आदेश आया है वह एकदम सहज है। इतना ही नहीं तहखाना में भी व्यास परिवार की तरफ से पूजा की गई थी जिस पर रोक लगाई गई उसे अब हटा भी दिया गया है। अभी ज्ञानवापी का निर्णय नहीं आया है शंकर जी निकलने हैं यह तय है। आपको बता दे की सनातन धर्म को लेकर बात करते हुए बाबा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा है कि हमें पता है कि देश में सनातन धर्म पर चर्चा करने वाले कुछ लोगों को सही जानकारी नहीं है, ऐसे ही लोग हैं जो केवल सनातन सनातन कहे जा रहे हैं। लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि सनातन धर्म क्या है ? सनातन के लक्षण क्या है ? सनातन का सिद्धांत क्या है और सनातन किसे कहते हैं ?

धीरेंद्र शास्त्री ने धर्म को लेकर पूछे सवाल

आपको बता दे की महंत जी का यह कहना है कि हम लोग सनातन की तुलना दूसरे मजहबों से कर रहे हैं जोकि कितनी उचित है और कितनी अनुचित ? धीरेंद्र शास्त्री जी ने कहा सनातन का मूल क्या है सनातन का उद्देश्य क्या है ? उन्होंने यह भी बताया है कि सनातनी होने के लक्षण पुस्तक में विस्तार से बताया गया है पूरी जानकारी दी गई हैं। शास्त्री जी ने यह भी बताया है की किताब उन्होंने दक्षिण राज्य में बीते 6 महीने पहले 5 दिन में भगवान हनुमान से मिली प्रेरणा से लिखी है।

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