समलैंगिक विवाह पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, एक दूसरे से शारीरिक नही भावनात्मक मिलन

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से जुड़ी याचिकाओं पर गुरुवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई.

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सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से जुड़ी याचिकाओं पर गुरुवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई. इस बेंच की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि क्या शादी के लिए दो अलग-अलग जेंडर होना जरूरी है. इस बेंच में जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एसआर भट्ट, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा भी शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट

समलैंगिक विवाह को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट और यूट्यूब पर लाइव दिखाई जा रही है. मामले में सुनवाई के तीसरे दिन CJI चंद्रचूड़ ने कहा, 'हम इन रिश्तों को एक बार के रिश्तों के रूप में नहीं देखते हैं, बल्कि हमेशा के लिए चलने वाले रिश्तों के रूप में देखते हैं. जो न केवल शारीरिक बल्कि भावनात्मक मिलन भी है.

भारतीय परिवार की अवधारणा

समलैंगिकता पर 2018 के आदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर हमने न केवल सहमति से एक ही लिंग के वयस्कों के बीच संबंधों को मान्यता दी है, बल्कि हमने यह भी माना है कि जो लोग समान लिंग के हैं वे भी एक साथ रहने में सक्षम होंगे. केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से जुड़ी याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि भारतीय परिवार की अवधारणा पति, पत्नी और बच्चों की है, जिसकी तुलना समलैंगिक विवाह से नहीं की जा सकती.



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