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होली से एक दिन पहले होलिका दहन का दिन मनाया जाता है। होली को रंगों, उमग और नई ऊर्जा का त्योहार कहा जाता है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर देखा जाता है। होली की अग्नि से आसपास और हमारी जिंदगी में सकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। पूरे भारत में होलिका दहन चौक-चौराहे पर किया जाता है। इसे भद्रा काल में नहीं किया जाता है। इस बार होली पर भद्रा का साया देखने को मिल रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कब तक है भद्रा का साया, जिसे आपको ध्यान में रखना चाहिए।
13 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन होने वाला है। होलिका दहन के लिए भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि उत्तम मानी जाती है। हिंदू धर्म में अशुभ माना जाता है। भद्रा लगने पर कोई भी शुभ काम नहीं किए जाते हैं। हिंदू धर्म में ये अशुभ माना जाता है। भद्रा जब लगाता है तो कुछ भी शुभ काम नहीं किया जाता। जानकारी के लिए बता दें कि फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 13 मार्च 2025 को सुबह 10.35 मिनट पर होगी और अगले दिन 14 मार्च को दोपहर 12.23 तक रहेगी। इतना ही नहीं ये जानना भी आपके लिए जरूरी है कि फाल्गुन पूर्णिमा यानी होलिका दहन वाले दिन चंद्र ग्रहण भी रहेगा।
इस समय तक रहेगा भद्रा का साया
वहीं, इन सबके अलावा 13 मार्च को भद्रा पूंछ शाम 06.57 मिनट से रात 08.14 तक रहेगा। इसके बाद भद्रा मुख का समय शुरू हो जाएगा जो रात 10.22 मिनट तक रहेगा। इसके बाद ही होलिका दहन करना शुभ होगा।




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