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क्या हो अगर आप दिल्ली में रहते है और किसी दिन घर ही न पहुंचे? क्या हो अगर आप अपने घर में कमाने वाले एक ही इंसान हो? क्या हो अगर आपकी माँ, आपकी पत्नी, भाई, बहन या पिता आपका इंतजार ही करते रह जाए और आप कभी वापस ही न आए?
ये कोई ख्याली सवाल नहीं है ये सच्चाई है देश की राजधानी की, जिसको सजाने-सवारने के लिए हर साल लाखों-करोड़ों का वित्तीय बजट पेश किया जाता है| इतना कुछ करने के बाद भी आपका कोई अपना घर न लौटे तो कैसा लगेगा? आपका कोई अपना चले जाएगा तो उसकी कमी ज़िंदगी भर नहीं पूरी होगी, पर कभी सोचा है सरकार क्या करेगी? सरकारे कभी कुछ नहीं करती है वो केवल कुछ लोगों को निलंबित करेंगे और कुछ पर जाँच बैठा देंगे| आज मैं जिस घटना की बात कर रहा हूँ उसे समझने के लिए हमें पहले यह जानना होगा कि आखिर ये मामला क्या है?
मामला क्या है?
दिल्ली के जनकपुरी में एक 25 साल का लड़का रहता था जिसका नाम कमल ध्यानी था| वह एक प्राइवेट बैंक में काम करता था | घटना की रात वह अपने काम से घर लौट रहा था, लेकिन वह अपने तय समय पर घर नहीं पहुंचा तो घरवालों में बेचैनी होने लगी तो उनलोगों ने घर से निकल के खोजने का प्रयास किया लेकिन कहीं भी उसका कुछ पता नहीं चला| घरवालों के मन में किसी अनहोनी की आशंका होने लगी जिसके बाद वो लोग नजदीक के थाने में जाकर पुलिस से गुहार लगाई कि कमल को खोने में मदद की जाए, लेकिन पुलिस ने क्या किया? पुलिस ने घरवालों की मदद करने के बजाय उन्हें घर जाने को कहा क्योंकि रात में नहीं खोजा जा सकता है|
मृतक के भाई के भाई का दावा है कि वो अपने भाई के खोज के लिए रात भर में 6 थाने गए लेकिन किसी ने भी उसकी मदद नहीं की| उसका दावा है कि उसके कहने पर पुलिस ने कमल का लोकेशन भी पता कर लिया था पर रात होने के कारण खोजने नहीं गया|
यह बात हुई रात की जब कमल अपने तय समय से घर नहीं पहुंचा, घरवालों के द्वारा उसकी खोज हुई पर मिला नहीं| अगली सुबह घर वालों को पुलिस की तरफ से कॉल आया कि एक्सीडेंट में कमल की मौत हो गयी है| अब सवाल आता है उसकी एक्सीडेंट कैसे हुई जबकि वह एक गड्ढे में गिर कर मरा था?
जिस गड्ढे में गिर कर कमल की मौत हुई थी वो कोई आम गड्ढा नहीं था बल्कि शासन तंत्र के द्वारा खोदा गया ‘डेथ वेल’ था| हाँ ऐसा इसलिए क्योंकि वह गड्ढा दिल्ली जल बोर्ड के द्वारा खोदा गया था, जिसके आसपास न कोई सूचना पट्ट था और न कोई बैरिकेडिंग जिससे लोगों को पता चल सके के कि जिस रस्ते से वो रोज-आते जाते है आज उसमें अचानक से कैसे गड्ढा हो गया? इसी गड्ढे में गिर कर कमल की मौत हो गई| जिससे साफ़ है कि यह कोई दुर्घना नहीं बल्कि शासन की लापरवाही का नतीजा है कि आज एक माँ का आँगन सूना हो गया, एक भाई का सहारा चला गया, एक पिता जो 25 सालों तक उसे लाड़-प्यार से पाला था वो आज बेसहारा हो गया| यह कोई एक दिन की घटना नहीं है जिसे दुर्घटना बोल के टाल दिया जाए, बल्कि इससे पहले भी शासन तंत्र की लापरवाही के कारण कई लोग अपनी जान गवा चुके है| कुछ दिन पहले ही ग्रेटर नोएडा में युवराज की मौत हुई थी, लेकिन तब भी सरकार ऐसी लापरवाही करने वालों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाती है|
पुलिस का बयान
इसी बीच दिल्ली पुलिस के डी.सी.पी. का बयान सामने आया है| इस घटना के बारे में पश्चिमी दिल्ली के डी.सी.पी. शरद भास्कर ने कहा कि— “ जल बोर्ड के काम के लिए एक गड्ढा खोदा हुआ है जिसमें श्री कमल ध्यानी जी हैं जिनकी उम्र 25 है| उनकी बाइक गड्ढे में गिर गई और दुर्भाग्य से उनकी मौत हो गई| इस गड्ढे को किसने खोदा, इसमें कौन-कौन अधिकारी शामिल है|”
ताजा जानकारी के अनुसार इससे जुड़े 3 लोगों पर करवाई की जाएगी| बाकि इस विषय पर आपकी क्या राय है वो जरूर दे| क्या ये घटना सरकारी सिस्टम के कारण हुआ या फिर इसका ऐसा भी एंगल है जिसके बारे में हम सोच नहीं रहे है? क्योंकि उनके दोस्तों को कहना है कि कमल जो रोज आता-जाता था तो वो उस रस्ते से क्यों आएगा? इन प्रश्नों का जवाब आपके पास हो तो हमें जरूर कमेंट में बताएं|




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