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महाराष्ट्र सरकार में भूचाल: धनंजय मुंडे ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा, जानिए पूरा मामला
महाराष्ट्र सरकार में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के कैबिनेट मंत्री धनंजय मुंडे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके निजी सचिव (PA) प्रशांत जोशी, इस्तीफा लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आवास पहुंचे। धनंजय मुंडे का नाम उनके करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड से जुड़े एक हत्या के मामले में सामने आने के बाद यह इस्तीफा आया है।
क्यों देना पड़ा इस्तीफा?
सरपंच संतोष देशमुख की हत्या के मामले में CID (अपराध अन्वेषण विभाग) द्वारा दायर आरोपपत्र में वाल्मिक कराड को आरोपी बनाया गया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने धनंजय मुंडे से इस्तीफा देने के लिए कहा।
सूत्रों के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी इस मामले पर फडणवीस से चर्चा की थी, जिसमें CID की जांच रिपोर्ट और आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर विस्तार से बातचीत हुई। आखिरकार, सरकार पर बढ़ते दबाव के चलते धनंजय मुंडे को मंत्री पद छोड़ना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
बीड जिले के मासाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या बीते साल 9 दिसंबर को हुई थी। आरोप है कि जिले में एक ऊर्जा कंपनी से जबरन वसूली का प्रयास किया जा रहा था, जिसका विरोध करने पर देशमुख को अगवा कर लिया गया और प्रताड़ित किया गया। इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई।
राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (CID) ने इस हत्याकांड और उससे जुड़े दो अन्य मामलों में 1,200 से अधिक पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। बीड जिले की एक अदालत में पेश किए गए इस आरोपपत्र में आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार?
इस हत्याकांड में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी अभी भी फरार है। पुलिस की टीम उसे पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
धनंजय मुंडे का राजनीतिक भविष्य क्या होगा?
धनंजय मुंडे महाराष्ट्र की राजनीति में एक मजबूत कद रखते हैं। वे बीड जिले के परली से NCP के विधायक हैं और पहले बीड के संरक्षक मंत्री भी रह चुके हैं। अब सवाल उठता है कि क्या इस्तीफे के बाद उनका राजनीतिक करियर खतरे में आ गया है, या फिर पार्टी उन्हें किसी और भूमिका में आगे बढ़ाएगी?
क्या इस इस्तीफे से सरकार पर कोई असर पड़ेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से महाराष्ट्र सरकार को कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा, लेकिन NCP और भाजपा के गठबंधन में दरार पड़ सकती है। विपक्ष भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रहा है, जिससे आने वाले दिनों में यह मामला और गरमाता नजर आ सकता है।
अब देखना होगा कि इस हत्याकांड की जांच कहां तक पहुंचती है और क्या इससे महाराष्ट्र की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव आता है या नहीं।




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