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The Logical Indian में छपी लेख के मुताबिक दिल्ली विश्विद्यालय के नार्थ कैंपस में University Grants Commission (UGC) Equity Regulations 2026 के समर्थन में विरोध प्रदर्शन चल रहा था जो दोपहर के बाद एक झड़प में बदल गया| इसका नतीजा यह हुआ कि प्रदर्शन को कवर कर रही एक महिला पत्रकार पर कथित हमला हुआ।
हमले ने मीडिया और सिविल सोसाइटी में चिंता पैदा कर दी है। प्रेस की आजादी के सपोर्टर्स का कहना है कि कैंपस में अशांति की रिपोर्टिंग करने पर जर्नलिस्ट्स को हिंसा या धमकी का सामना नहीं करना चाहिए, चाहे वे किसी भी विचार को रिप्रेजेंट करें या किसी भी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने एक बयान जारी कर कैंपस में हिंसा की सभी घटनाओं की निंदा की और सुरक्षा और नॉर्मल हालात सुनिश्चित करने का अपना वादा दोहराया। उन्होंने कहा कि किसी भी गलत काम के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों से सही डिसिप्लिनरी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने दोहराया कि जांच चल रही है और वे सबूतों और मिली शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करेंगे।
जो वीडियो सामने आई है उसको देखने के बाद लग रहा है कि किसी गरमा-गर्मी के बाद महिला रिपोर्ट और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस होने, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों ने रिपोर्टर्स के साथ दुर्व्यवहार करने का प्रयास किया| वीडियो के पुरे हिस्से को देखने से लग रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने महिला पत्रकार को एक तरह से बंधी बना किया है जैसे उसने कोई जुर्म किया हो, पत्रकार की पहचान रुचि तिवारी के तौर पर हुई है, पत्रकार की जाति भी इस विवाद का मुख्य वजह है| यह घटना एक तरह से मोब्लिंकिंग की तरह था|




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