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नमस्कार पाठकों! आज हम भारत के संघीय बजट 2026-27 के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किया। यह उनका लगातार नौवां बजट है, जो देश के इतिहास में एक रिकॉर्ड है। इस बजट को 'युवा शक्ति-संचालित बजट' कहा गया है, जो भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को उत्पादक क्षमता में बदलने पर केंद्रित है। बजट का मुख्य लक्ष्य आकांक्षाओं को उपलब्धियों में बदलना और संभावनाओं को प्रदर्शन में परिवर्तित करना है। इस बजट को तीन प्रमुख 'कर्तव्यों' पर आधारित बनाया गया है: आर्थिक विकास को तेज और स्थिर रखना, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना, और 'सबका साथ, सबका विकास' की दृष्टि को साकार करना (सभी के साथ विकास)।
बजट की पृष्ठभूमि में भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। FY26 के आर्थिक सर्वेक्षण में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8% से 7.2% के बीच अनुमानित की गई है, जबकि FY27 के लिए नाममात्र जीडीपी वृद्धि 10% बजट की गई है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, सरकार ने 'अनिश्चय पर कार्रवाई, बयानबाजी पर सुधार, और राजनीति पर लोगों' की नीति अपनाई है। इस बजट का उद्देश्य मुद्रास्फीति को मध्यम रखना, निरंतर विकास सुनिश्चित करना, राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना और आयात निर्भरता को कम करना है। अब हम बजट के प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
राजकोषीय स्थिति और समेकन
बजट में राजकोषीय अनुशासन को प्राथमिकता दी गई है। FY 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3% अनुमानित है, जो FY26 के संशोधित अनुमान 4.4% से कम है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक ऋण-से-जीडीपी अनुपात को 50±1% तक लाना है, जो वर्तमान में 55.6% अनुमानित है। FY27 के लिए राजस्व प्राप्तियां 18.1 लाख करोड़ रुपये अनुमानित हैं, जबकि व्यय 41.3 लाख करोड़ रुपये होगा। कुल व्यय FY26 के संशोधित अनुमान से 7.7% अधिक है, जो ₹53,47,315 करोड़ है।
राजस्व व्यय में 6.6% की वृद्धि बजट की गई है, जबकि पूंजीगत व्यय को रिकॉर्ड ₹12.2 लाख करोड़ (जीडीपी का 3.1%) रखा गया है। यह पिछले वर्ष के ₹11.2 लाख करोड़ से अधिक है, जो बुनियादी ढांचे पर जोर दर्शाता है। FY27 में सकल कर राजस्व (GTR) वृद्धि 8% अनुमानित है, जिसमें प्रत्यक्ष करों में 11.4% और अप्रत्यक्ष करों में 3% वृद्धि शामिल है। राज्यों को सौंपी गई राशि में 9.6% की वृद्धि है।
युवा शक्ति और क्षमता निर्माण
बजट का केंद्र बिंदु युवा हैं। सरकार ने युवाओं की क्षमता निर्माण, रोजगार और उद्यमिता पर जोर दिया है। कौशल विकास, शिक्षा-से-रोजगार मार्ग और एमएसएमई को बढ़ावा देने के उपाय शामिल हैं। स्टार्ट-अप्स के लिए सकारात्मक संकेत हैं, जैसे एमएसएमई ग्रोथ फंड, सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड, और ट्रेड रिसीवेबल्स इलेक्ट्रॉनिक डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) का विस्तार। डेटा सेंटर्स, क्लाउड सेवाएं, फिनटेक और सेवा निर्यात पर नीतियां टेक-सक्षम स्टार्ट-अप्स के लिए अवसर खोलती हैं।
विनिर्माण और एमएसएमई
बजट का एक प्रमुख फोकस सात रणनीतिक और सीमांत क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा देना है। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना, 'चैंपियन एमएसएमई' बनाना और सार्वजनिक पूंजीगत व्यय से निजी निवेश को प्रोत्साहित करना शामिल है। छोटे और सूक्ष्म उद्यमों पर मजबूत जोर है, जो ग्रामीण विकास, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और किसान आय बढ़ाने में मदद करेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा, AVGC, AI और डीप-टेक जैसे उभरते क्षेत्रों पर ध्यान स्टार्ट-अप्स को लाभ पहुंचाएगा।
बुनियादी ढांचा और ऊर्जा
बुनियादी ढांचे के लिए आवंटन ₹12.2 लाख करोड़ है, जो पिछले वर्ष से अधिक है। यह ईपीसी ठेकेदारों, डेवलपर्स और फाइनेंसरों के लिए मांग का संकेत है। ऊर्जा संक्रमण और सुरक्षा पर जोर है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, उच्च विकास दर और संरचनात्मक सुधार शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के लिए कुल आवंटन ₹7,84,678 करोड़ है, जिसमें पूंजीगत व्यय में 21.83% की वृद्धि है। यह आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करता है।
कृषि और ग्रामीण विकास
कृषि पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें किसान आय, पशुपालन, मत्स्य पालन और प्रौद्योगिकी-सक्षम कृषि शामिल है। बजट में कृषि, एमएसएमई विकास और AI, रोबोटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों पर फोकस है। ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के लिए ₹1.4 लाख करोड़ की अनुदान राशि प्रदान की गई है।
कर सुधार और जीएसटी
प्रत्यक्ष करों में कोई बड़ा बदलाव नहीं है। पुराने और नए कर शासनों में आयकर दरें और स्लैब अपरिवर्तित हैं। नया आयकर अधिनियम 2025 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा, जिसमें सरलीकृत नियम और फॉर्म जल्द अधिसूचित किए जाएंगे। जीएसटी में कोई बड़ी दर परिवर्तन नहीं, लेकिन मूल्यांकन, क्रेडिट समायोजन और रिफंड में सुधार किए गए हैं। कॉर्पोरेट कर दरों में कोई बदलाव नहीं। IFSC इकाइयों के लिए कर छूट अवधि 20 वर्ष तक बढ़ाई गई है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण
स्वास्थ्य और शिक्षा पर निवेश बढ़ाए गए हैं, जो निचले आर्थिक स्तर के लोगों को ऊपर उठाने में मदद करेंगे। फोकस गरीबों, वंचितों और पिछड़े वर्गों पर है। डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का विकास सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देगा।
समग्र प्रभाव और चुनौतियां
यह बजट विकसित भारत की दिशा में एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें विकास, समावेशन और स्थिरता का मिश्रण है। भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच, भारत की लगभग 7% की विकास दर सराहनीय है। हालांकि, जीएसटी राजस्व में संकुचन और अप्रत्यक्ष करों की कम वृद्धि चिंता का विषय है। सरकार को निजी निवेश को और अधिक प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 भारत को मजबूत, समावेशी और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। युवा शक्ति को केंद्र में रखकर, यह देश के भविष्य को उज्ज्वल बनाने का प्रयास करता है। क्या आपको लगता है कि यह बजट आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरा? कमेंट्स में बताएं!




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