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कबीर दास जी ने लिखा है – ‘ना काहू से दोस्ती ना कहु से बैर’ इस पंक्ति को वर्तमान के संदर्भ में इस तरह समझा जा सकता है कि अमेरिका से न दोस्ती करना फायदेमंद होता है न ही दुश्मनी ही करना, क्योंकि अमेरिका सबको अपने हितों के लिए इस्तेमाल करता है|
पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने पाक संसद में अमेरिका को लेकर एक बयान दिया है जो काफी तेजी से वायरल हो रहा है| अमेरिका पर आरोप लगाते हुए आसिफ ने कहा अमेरिका ने अपने strategic हिट के लिए इस्लामाबाद को टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया|
आगे आसिफ ने कहा अफगानिस्तान में पाकिस्तान ने जो भी जंग लड़ा वो धर्म यानी कि ‘जिहाद’ की लड़ाई नहीं थी वो अमेरिका के लिए लड़ा गया था| इन युद्दों से पाकिस्तान को बहुत नुकसान हुआ| आसिफ ने अपने बयान में पाकिस्तान के हालात के जिम्मेदार अमेरिका को मानते हुए कहा कि अमेरका का समर्थन करना सबसे बड़ी गलती थी, जिसको पाकिस्तान अभी तक झेल रहा है|
उन्होंने माना कि पाकिस्तानियों को जिहाद के बैनर तले लड़ने के लिए भेजा गया था और इस तरह की सोच को गुमराह करने वाला और नुकसानदायक बताया। आसिफ ने कहा कि इन लड़ाइयों को सही ठहराने के लिए पाकिस्तान के एजुकेशन सिस्टम को भी बदल दिया गया था और उनमें से कई सोच में बदलाव आज भी मौजूद है|
आसिफ ने कहा कि 1999 के बाद, खासकर 11 सितंबर, 2001 के हमलों के बाद, US के साथ जाने की कीमत बहुत ज्यादा थी। उन्होंने पुराने मिलिट्री शासकों ज़िया-उल-हक और परवेज़ मुशर्रफ़ पर आरोप लगाया कि उन्होंने पाकिस्तान को विदेशी लड़ाइयों में शामिल किया|
बहुत ही सीधी भाषा का इस्तेमाल करते हुए, आसिफ ने सांसदों से कहा कि पाकिस्तान के साथ “टॉयलेट पेपर से भी बुरा बर्ताव किया गया”, उसे एक मकसद के लिए इस्तेमाल किया गया और फिर फेंक दिया गया।




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