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चर्चा में क्यों है?
आज भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य एवं अंत्योदय और एकात्म ‘मानववाद’ दर्शन के प्रणेता दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि है| आज भारतीय जनता पार्टी (bJP) के सभी सदस्यों ने पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया| इस दिन को BJP ‘समर्पण दिवस’ के रूप में मनाती है|
कौन थे दीनदयाल उपाध्याय?
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर 1916 ई. को हुआ था| वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिंतक और संगठनकर्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद नामक विचारधारा दी। वे एक समावेशी विचारधारा के समर्थक थे जो एक मजबूत और सशक्त भारत चाहते थे।
21 अक्टूबर 1951 को डॉ० श्यामाप्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता में 'भारतीय जनसंघ' की स्थापना हुई। 1952 में इसका प्रथम अधिवेशन कानपुर में हुआ। उपाध्याय जी 'भारतीय जनसंघ' के महामंत्री बने। 1967 तक उपाध्याय जी भारतीय जनसंघ के महामंत्री रहे। 1967 में कालीकट अधिवेशन में उपाध्याय जी भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वह मात्र 43 दिन जनसंघ के अध्यक्ष रहे।
क्या है मौत से जुड़ा राज?
10/11 फरवरी 1968 की रात्रि में मुगलसराय स्टेशन पर उनकी हत्या कर दी गई। 11 फरवरी को प्रातः पौने चार बजे सहायक स्टेशन मास्टर को खंभा नं० 1276 के पास कंकड़ पर पड़ी हुई लाश की सूचना मिली। शव प्लेटफार्म पर रखा गया तो लोगों की भीड़ में से चिल्लाया- "अरे, यह तो जनसंघ के अध्यक्ष दीन दयाल उपाध्याय हैं।"
भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता से लेकर शीर्ष नेताओं ने पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दीनदयाल उपाध्याय को याद किया|
प्रधानमंत्री ने X पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा
भारत के प्रधानमंत्री ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपने X पर लिखा— “मातृभूमि के अनन्य उपासक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को उनकी पुण्यतिथि पर सादर नमन। मूल्यों पर आधारित उनके सिद्धांत और विचार देश की हर पीढ़ी के लिए पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे।|
वही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा — “भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य, एकात्म मानववाद के प्रणेता श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर आज लखनऊ में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
सशक्त राष्ट्र के निर्माण तथा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की ज्योति पहुंचाने का उनका संदेश हम सभी के लिए अप्रतिम प्रेरणा का स्रोत है।
उनकी पावन स्मृतियों को नमन!”




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