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हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। इस दिन कई विधि-विधान होते हैं स्नान दान के साथ पुण्य के काम किए जाते हैं। सभी पुर्णिमाओं में शरद पूर्णिमा को खास माना जाता है। इस पूर्णिमा को लेकर यह मानना है कि यह एक ऐसा दिन होता है जब चंद्रमा सबसे ज्यादा शक्तिशाली होता है। शरद पूर्णिमा के दिन पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ को खास महत्व दिया जाता है। शरद पूर्णिमा को शरद पूनम और रास पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं। यह वह दिन माना जाता है जब भगवान कृष्ण ने गोपियों के संग महारास रचाया था।
बरसता है अमृत
शरद पूर्णिमा के दिन रात में चंद्रमा की रोशनी में खीर रखा जाता है। इसके पीछे यह मान्यता होती है कि चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है जो खीर को अमृत के गुणों में बदल देता है। शरद पूर्णिमा की खीर खाने से मन को शांति और सेहतमंद होने का लाभ मिलता है।
चंद्र दोष से मुक्ति
शरद पूर्णिमा में चांद की रोशनी में रखा हुआ खीर खाने से कुंडली में चंद्रमा ग्रह मजबूत हो जाता है। अगर आप इस दिन खीर बनाकर लोगों को खिलाते हैं तो चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है।
मां लक्ष्मी को लगाएं भोग
शरद पूर्णिमा के दिन खीर बनाकर माता लक्ष्मी को भोग लगाना चाहिए इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है और घर में धन की कमी नहीं होती शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने के बाद ही आपको ग्रहण करना होता है।
खास है शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा से बरसने वाला अमृत खीर को पौष्टिक और दिव्य बना देता है। इस तरह से खीर को ग्रहण करने से सेहत अच्छी रहती है और समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। यह दिन बेहद खास होता है जब आप अपने जीवन से जुड़ी कई परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं।
कब है शरद पूर्णिमा और मुहूर्त
इस साल शरद पूर्णिमा 16 अक्टूबर को रात 8:40 से शुरू हो रहा है। शरद पूर्णिमा की समाप्ति 17 अक्टूबर को शाम 4:55 पर हो रही है।




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