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Trump का ‘Epstein Card’- Modi पर संकट या ग्लोबल ताज !

यह आर्टिकल अमेरिका द्वारा जारी एप्सटीन फाइल से जुड़ा है जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम शामिल होने का जिक्र है| यह फाइल प्रधानमंत्री मोदी के 2017 इसरायल के आधिकारिक दौरे से जुड़ा हुआ हैं|

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By Sushant Kumar | Faridabad, Haryana | राजनीति - 03 February 2026

क्या  ट्रंप के  ‘एपस्टीन कार्ड’ से मोदी हो जाएंगे बदनाम? या सच्चाई आते ही मोदी हो जाएंगे दुनिया के नए बादशाह?  

नमस्कार दोस्तों Instafeed में आप सभी का स्वागत है| आज हम बात करेंगे एक ऐसी खबर की जिसके कारण भारत की राजनीतिक विरासत खतरे में है, क्योंकि यह पहला मामला है जब किसी प्रधानमंत्री का किसी यौन-उत्पीड़न जैसे संगीन आरोप में नाम आया है| 


खबर में क्यों है?

पिछले दिन हुए एक खुलासे ने भारत में सनसनी मचा दी है| यह खुलासा है एप्सटीन फाइल से जुड़ा हुआ| दावा किया जा रहा  है कि अमेरिका की विवादित एप्सटीन फाइल में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम शामिल है| 


क्या है मामला? 

पिछले शुक्रवार को अमेरिका की डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस  ने सेक्स स्कैंडल से जुड़े कई सारे इमेल्स,  चैट्स और फ़ोन कॉल  को पब्लिक किया, जिसमें दावा किया गया कि वर्ष 2017  में नरेंद्र मोदी इजरायल गए थे, इस यात्रा में अमेरिका के राष्ट्रपति ने डोनाल्ड ट्रम्प ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी|  इसमें यह भी दावा किया गया है कि— “ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने इंडिया- अमेरिका एग्रीमेंट को बढ़ाना चाहते थे, जिसके लिए मोदी ने ट्रम्प को खुश करने वाला काम किया था| इसके साथ यह भी दावा किया गया है कि  जेफ्री एप्सटीन ने ही मोदी और रिपब्लिकन पार्टी के स्टैटेजीएस्ट एवं ट्रम्प के सलाहकार के बीच मीटिंग करवाई थी|” 


सरकार का पक्ष 

31 जनवरी को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल  ने इसे एक छवि खराब करने वाला आरोप बता कर ख़ारिज कर दिया| 

उन्होंने अपने बयान में कहा—  "हमने तथाकथित एपस्टीन फाइल की इमेल्स, मैसेज की रिपोर्ट देखी है, जिसमें प्रधानमंत्री और उनकी इजरायल यात्रा का जिक्र है| जुलाई, 2017 में प्रधानमंत्री इजरायल की आधिकारिक यात्रा के अलावा ईमेल में बाकी बातें  एक  दोषी, अपराधी के बकवास  के अलावा कुछ भी नहीं है| इन्हें उसी तिरस्कार से नजरअंदाज करना चाहिए जिसके वो लायक है|”


बहरहाल सरकार की तरफ से आधिकारिक सफाई दी जा चुकी है पर अभी भी यह मामला शांत होता नहीं दिख रहा है| 

विपक्ष का रुख 

इस खबर के सामने आते ही विपक्ष ने सरकार से इस आरोप पर सफाई मांगी है और इसे ‘नेशन शेम’ कहा|

इसी बीच कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी जयराम रमेश ने एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा कि — “अमेरिकी सरकार द्वारा हालिया जारी एपस्टीन फाइल में प्रधानमंत्री के नाम का कई बार जिक्र है और आगे विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता  को निशाना बनाते हुए कहा कि आधिकारिक प्रवक्ता को जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन अभी भी कई सारे सवाल है जिसका जवाब मिलना बाकी  है|” 


क्या है इतिहास?

एप्सटीन फाइल यौन-उत्पीड़न से जुड़ा हुआ दस्तावेज है, इसमें कुल 6 मिलियन डाक्यूमेंट्स, इमेज कॉल्स और वीडियो शामिल है| इसे अमेरिका के  फाइनेंसर जेफ्री एप्सटीन ने बनाया था| पहली बार इस फाइल को अमेरिका के द्वारा 19 दिसंबर, 2025 को जारी किया गया था, जिसमें दुनिया के बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आए थे| इसमें जो नाम शामिल थे उनमें अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति ट्रम्प एवं पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के नाम के साथ साथ ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रू एवं मशहूर उद्योगपति एलोन मस्क का भी नाम शामिल था।

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