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2011 जैसी तबाही नहीं! सोने की कीमतों में फिर लौटने वाली है तेजी, अगले साल के लिए गोल्‍ड का टारगेट

नई दिल्ली, November 8, 2026: 2011 जैसी तबाही नहीं! सोने की कीमतों में फिर लौटने वाली है तेजी, अगले साल के लिए गोल्‍ड का टारगेट। WGC की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर में सोने की कीमतों में 6.3 फीसदी…

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Image Credit: Instafeed Desk
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By Pandey Gaurav | Mumbai, Maharashtra | व्यापार - 08 November 2026

नई दिल्ली, November 8, 2026: 2011 जैसी तबाही नहीं! सोने की कीमतों में फिर लौटने वाली है तेजी, अगले साल के लिए गोल्‍ड का टारगेट।

WGC की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर में सोने की कीमतों में 6.3 फीसदी की गिरावट आई। यह जनवरी 2026 के रिकॉर्ड हाई 5,405 डॉलर प्रति औंस से करीब 25 फीसदी नीचे है। हालांकि, काउंसिल का मानना है कि कीमतें अब अपने निचले स्तर (इंटरिम बॉटम) के करीब पहुंच रही हैं। WGC के विश्लेषण के मुताबिक, ऐतिहासिक रूप से सोने की रिकवरी के लिए तीन शर्तें प्रमुख रही हैं। तकनीकी कमजोरी (200-डे एवरेज से नीचे कारोबार), अमेरिकी डॉलर में मजबूती और फ्यूचर्स मार्केट में स्‍पेकुलेटिव पोजीशन्स में कमी। अभी इनमें से पहली दो शर्तें पूरी हो चुकी हैं। तीसरी शर्त का पूरा होना अभी बाकी है। 2005 के बाद के आंकड़ों के मुताबिक, जब भी दो शर्तें पूरी हुई हैं तो अगले 3 महीनों में सोने में औसतन 4.2 फीसदी की बढ़त देखी गई है।

काउंसिल ने इस बात पर जोर दिया है कि मौजूदा गिरावट की तुलना 2011 के बाद आई कई सालों की लंबी मंदी से करना गलत होगा। 2011 के उलट इस बार बुनियादी आर्थिक स्थितियां काफी ज्‍यादा मजबूत हैं। अभी रियल यील्ड्स सीमित दायरे में हैं। अमेरिकी डॉलर महंगा बना हुआ है। ग्‍लोबल जियो-पॉलिटिकल रिस्‍क भी काफी ऊंचे स्तर पर हैं। ये सभी फैक्‍टर सोने के लिए मजबूत सपोर्ट का काम कर रहे हैं। WGC का कहना है कि कीमतें आगे अगर 3,857 डॉलर प्रति औंस के फिबोनाची सपोर्ट लेवल को टेस्ट भी करती हैं तो यह खरीदारी का बेहतरीन और आकर्षक अवसर हो सकता है।

अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद सोने की चाल पर अब सरकारी नीतियों, शेयर-क्रेडिट मार्केट के ट्रेंड और महंगाई के दबावों का असर देखने को मिल सकता है। इसी बीच कच्चे तेल (क्रूड) की कीमतों में आई हालिया तेजी ने महंगाई की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। Tastylive के ग्लोबल मैक्रो हेड इल्या स्पिवाक के मुताबिक, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने की संभावना को बल देती हैं। सोना चूंकि ब्‍याज देने वाला एसेट नहीं है। लिहाजा, ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदों के कारण सोने पर तात्कालिक दबाव देखने को मिल रहा है।

भारत में अभी सोना 1.45 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास है। लेकिन, जानकारों का मानना है कि इसमें नई रैली देखने को मिल सकती है। 'केडिया एडवाइजरी' के एमडी और डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, सोना अगले साल आने वाली दिवाली तक अपने पिछले 1.80 लाख रुपये के सबसे ऊंचे स्तर को तोड़कर 1.95 लाख रुपये से 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम की सीमा तक पहुंच सकता है। पिछले एक दशक में सोने के 12-13 फीसदी के एनुअल रिटर्न का हवाला देकर वह इसे अन्य एसेट क्‍लास की तुलना में ज्‍यादा आकर्षक मानते हैं। हालिया गिरावट को वह एक अच्छा अवसर बता रहे हैं। हालांकि, ग्‍लोबल जियो-पॉलिटिकल और राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण उन्होंने निवेशकों को बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के प्रति सतर्क रहने की सलाह भी दी है।

स्रोत: Instafeed Desk।

तस्वीर: Carol M. Highsmith, Wikimedia Commons, Public domain

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