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खबर क्या है?
AI summit में भाग लेने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन भारत की यात्रा पर आ रहे है| राष्ट्रपति मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे| इस दौरान राष्ट्रपति भारत द्वारा आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे और मुंबई में प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता करेंगे| यह मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा और मुंबई की पहली यात्रा होगी|
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मक्रोन से मुंबई में मुलाकात करेंगे| प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रॉन के इस बैठक में भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी|
HAMMER का निर्माण अब भारत में होगा?
भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (BEL) ने फ्रांस की कंपनी सफरान एंड डिफेंस (SED) के साथ HAMMER हथियार प्रणाली पर काम करने के लिए एक जॉइंट वेंचर का समझौता किया है|
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 17 फरवरी को बेंगलुरु, कर्नाटक में फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉरेन के साथ छठे भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद की सह-अध्यक्षता करेंगे| इस दौरान दोनों देश एक महत्वपूर्ण रक्षा सहयोग समझौते को अगले दस वर्षों के लिए नवीनीकृत कर सकते हैं| साथ ही Highly Agile Modular Munition Extended Range (HAMMER) मिसाइल के संयुक्त निर्माण के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है| इस समझौते के बाद HAMMER मिसाइल भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ओरिजिनल फ्रेंच मैन्युफैक्चरर, सफ्रान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस के साथ 50-50 जॉइंट वेंचर के ज़रिए बनाएगी|
क्या है HAMMER?
HAMMER एक सटीक मार्गदर्शित (प्रिसिजन-गाइडेड) हथियार है, जो लगभग 70 किलोमीटर तक की दूरी से दुश्मन के महत्वपूर्ण और मजबूत ठिकानों पर सटीक हमला कर सकता है| यह एडवांस्ड फाइटर जेट्स जैसे Dassault Rafale और HAL Tejas के साथ assemble होगा , जिससे उनकी मारक क्षमता बढ़ेगी| इस मिसाइल को पहली बार 2007 में पेरिस एयर शो में AASM (Armement Air-Sol Modulaire) नाम से सबके सामने दिखाया गया था। 2011 में इसका नाम बदलकर HAMMER कर दिया गया। इसे मीडियम रेंज के हवा से जमीन पर मार करने वाले हथियार की कैटेगरी में रखा गया है।
HAMMER की खासियत क्या है?
इसका वजन लगभग 330 किलोग्राम है और इसे ज़्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में भी सटीक हमला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह फायर-एंड-फॉरगेट सिद्धांत पर काम करता है, जिसका मतलब है कि एक बार टारगेट लॉक हो जाने और मिसाइल लॉन्च हो जाने के बाद, इसे आगे गाइडेंस की ज़रूरत नहीं होती है। यह सिस्टम एक जगह रुके हुए और चलते हुए, दोनों तरह के टारगेट पर निशाना लगा सकता है और चूकने की संभावना को कम करने के लिए एडवांस्ड नेविगेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है। 125 किलोग्राम से लेकर 1,000 किलोग्राम तक के अलग-अलग वॉरहेड ऑप्शन उपलब्ध हैं। यह मिसाइल सभी मौसम में काम कर सकती है और दिन और रात दोनों ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल की जा सकती है। एक राफेल एयरक्राफ्ट छह 250 किलोग्राम की हैमर मिसाइलें ले जा सकता है, जिससे यह एक ही समय में छह अलग-अलग टारगेट पर हमला कर सकता है।




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