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New Delhi, November 5, 2026: Rupee Crash Alert: डराने वाला अलर्ट... US डॉलर के मुकाबले इतना टूटेगा रुपया, समझें नुकसान का गणित.
The source note says: अगले महीने से गिरने लगेगा रुपया! एक्सिस बैंक रिसर्च की ओर से रुपया को लेकर एक रिपोर्ट पेश की गई है, जिसमें अनुमान जाहिर किया गया है कि अगले साल दिसंबर 2027 तक रुपया US डॉलर के मुकाबले ₹102 तक टूट सकता है. लेकिन गिरावट यहीं थमने वाली नहीं है, बल्कि इसके अगले साल 2028 के आखिरी महीने में डॉलर के मुकाबले रुपये 106 तक कमजोर हो सकता है.
The source note says: मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट द मिडिल (किंगडम) पाथ में एक्सिस बैंक रिसर्च ने इंडियन करेंसी को लेकर पहले जताए गए अपने अनुमानों को बनाए रखा और मार्च 2027 तक USD/INR के 97–99 और जून 2027 तक 98–100 होने का अनुमान लगाया है.
The source note says: इस अनुमान के पीछे वजह क्या? रिपोर्ट में रुपये के टूटने के इस अनुमान के पीछे की वजह भी बताई गई हैं. इसमें कहा गया है कि Indian Currency Rupee की हालिया रिकवरी से सिर्फ कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, क्योंकि बाहरी सेक्टर के स्ट्रक्चरल दबाव, कैपिटल आउटफ्लो और फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को फिर से बनाने की जरूरत से रुपये पर दबाव बना रह सकता है. एक्सपर्ट्स ने भारत की एक्सटर्नल फाइनेंसिंग पोजीशन पर दबाव को बड़ी चिंता का विषय बताया है.
The source note says: इसमें बताया गया है कि भले ही सेंट्रल बैंक रुपया के उतार-चढ़ाव को रोकने की कोशिश में लगा हुआ है, लेकिन RBI के लगातार दखल से असरदार फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व कम हो गया है. ऐसे में इस रिजर्व को फिर से बनाना प्राथमिकता बनी रहेगी, जिससे विदेशी कैपिटल इनफ्लो में सुधार होने पर भी रुपये में अच्छी मजबूती की क्षमता सीमित हो सकती है. रिपोर्ट में लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत मंथली करीब 2–3 अरब डॉलर और ओवरसीज़ डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट से करीब 3 अरब डॉलर आउटफ्लो पर भी फोकस किया गया.
The source note says: लंबी गिरावट के बाद हाल में संभला रुपया गौरतलब है कि लंबे समय के लिए मंदी के नजरिए के बावजूद, लगातार टूट रहा भारतीय रुपया बीते सप्ताह ही संभला नजर आया है. डॉलर के मुकाबले ये 37 पैसे मजबूत हुआ है, जिसके लिए बेहतर फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट, US ट्रेजरी यील्ड में कमी और स्थिर डॉलर से सपोर्ट मिला. NSDL डेटा को देखें, तो पिछले हफ्ते नेट फॉरेन पोर्टफोलियो इनफ्लो करीब 2 अरब डॉलर रहा. इसके अलावा US 10-साल की ट्रेजरी यील्ड लगभग 4.9% तक कम हुई है, जिससे इमर्जिंग-मार्केट करेंसी पर दबाव घटा. इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई और ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर आ गया.
The source note says: कमजोर रुपया, तो कहां-कहां असर? किसी भी देश के करेंसी का टूटना उसकी इकोनॉमी के लिए ठीक नहीं होता है. अगर बात इंडियन रुपया की करें, तो इसकी कीमत कम होने से डॉलर में होने वाले तमाम खर्च, जैसे क्रूड ऑयल का आयात, विदेशी सामानों का आयात महंगा हो जाता है. तेल महंगा होने से देश में महंगाई का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा विदेश में पढ़ाई, इंटरनेशनल ट्रैवल और इम्पोर्टेड सामान पर ज्यादा रुपया खर्च होता है.
The source note says: उदाहरण से समझें, तो 50,000 डॉलर का विदेश में पढ़ाई का खर्च ₹95 प्रति डॉलर के एक्सचेंज रेट पर ₹47.5 लाख होगा, लेकिन अगर एक्सिस बैंक रिसर्च के मुताबिक, दिसंबर 2027 में रुपया डॉलर के मुकाबले अनुमाति ₹102 पर पहुंच जाता है, तो यह खर्च बढ़कर ₹51 लाख हो जाएगा, यानी सीधे ₹3.5 लाख रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे.
The source note says: भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है और इसका पेमेंट डॉलर में करता है. रुपया कमजोर होता है, जो इम्पोर्ट कॉस्ट में भी बड़ा इजाफा होगा और आयात बिल बढ़ने से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम में उछाल आ सकता है. खासतौर पर डीजल महंगा होने से जरूरी सामनों का ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा और इससे देश में महंगाई खतरा बढ़ सकता है.
Source: Instafeed Desk.

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