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नई दिल्ली, November 6, 2026: डीआर काँगो: इबोला के ख़िलाफ़ नई उम्मीद, परीक्षण में शामिल होंगे दो नए टीके।
World Bank/Vincent Tremeau काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य के बेनी में स्वास्थ्यकर्मी द्वारा एक व्यक्ति को वैक्सीन दी जा रही है. फेसबुक Twitter छापा ईमेल
काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला वायरस के जानलेवा प्रकोप के बीच, दो नए टीकों के परीक्षण की सिफ़ारिश की गई है. इबोला वायरस की बुंडिबुग्यो प्रजाति से बचाव के लिए विकसित इन टीकों से बीमारी पर क़ाबू पाने की नई उम्मीद जगी है
परीक्षण में शामिल किए जाने वाले दो नए टीके हैं – ChAdOx1, जिसे ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय ने भारत के सीरम इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर विकसित किया है, और mRNA-1469, जिसे अमेरिकी दवा कम्पनी मॉडर्ना ने तैयार किया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) ने अपने स्वतंत्र विशेषज्ञ समूह की सिफ़ारिश पर इन दोनों टीकों को परीक्षण में शामिल करने का फ़ैसला किया है. यह पहली बार होगा जब ख़ासतौर पर बुंडिबुग्यो वायरस से बचाव के लिए विकसित टीकों का परीक्षण, बीमारी का प्रकोप जारी रहने के दौरान किया जाएगा.
WHO के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा, “इन टीकों का क्लीनिकल परीक्षण के लिए तैयार होना, विज्ञान और साझेदारी की ताक़त का प्रमाण है.”
उन्होंने कहा कि अकेले टीकों से इस प्रकोप को समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन ये बीमारी पर क़ाबू पाने का एक नया और प्रभावी उपाय साबित हो सकते हैं.
डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ समूह ने उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों की समीक्षा के बाद इसी सप्ताह दोनों टीकों के क्लीनिकल परीक्षण की सिफ़ारिश की है.
डीआर काँगो में इबोला वायरस की दुर्लभ बुंडिबुग्यो प्रजाति का जानलेवा प्रकोप लगभग छह महीनों से जारी है. यह देश के इतिहास में इबोला का सबसे बड़ा प्रकोप है. 1 नवम्बर तक संक्रमण के 10 हज़ार से अधिक मामलों की पुष्टि हुई थी और पाँच हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी.
इस बीच, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी, 'तुमाइनी' (Tumaini) नामक बहु-टीका परीक्षण में सहयोग प्रदान कर रहा है. स्वाहिली भाषा में इसका अर्थ है 'उम्मीद'. यह परीक्षण 23 अक्टूबर को देश के पूर्वोत्तर में स्थित बुनिया शहर में शुरू हुआ, जो इतुरी प्रान्त की राजधानी और इबोला प्रकोप का मुख्य केन्द्र है.
इसके तहत इबोला वायरस की ज़ायर प्रजाति से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले एर्वेबो (Ervebo) टीके की जाँच की जा रही है, ताकि पता चल सके कि यह बुंडिबुग्यो प्रजाति के विरुद्ध भी कारगर है या नहीं.
आवश्यक राष्ट्रीय मंज़ूरी मिलने के बाद दोनों नए टीकों को भी इस परीक्षण में शामिल किया जाएगा.
'तुमाइनी' टीका परीक्षण के तहत एक ही क्लीनिकल परीक्षण में कई सम्भावित टीकों की प्रभावशीलता जाँची जाएगी.
इसके लिए 'रिंग वैक्सीनेशन' की रणनीति अपनाई जा रही है, जिसमें उन लोगों के टीकाकरण पर ध्यान दिया जाता है, जो इबोला वायरस की बुंडिबुग्यो प्रजाति से संक्रमित व्यक्तियों के सम्पर्क में आए हैं और जिनमें संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है.
लगभग एक दशक पहले पश्चिम अफ़्रीका में इबोला प्रकोप के दौरान डब्ल्यूएचओ और उसके साझीदारों ने यह रणनीति अपनाई थी. गिनी में हुए परीक्षण से एर्वेबो टीके की प्रभावशीलता साबित हुई थी.
स्रोत: Instafeed Desk।

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