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केंद्र सरकार ने भारत में अब तक न खोजे गए तेल और गैस भंडारों की तलाश को एक बार फिर से, और भी अधिक आक्रामक तरीके से करने का संकल्प लिया है। 26 मई, 2026 को घोषित इस योजना का उद्देश्य उन कई सेडिमेंट्री बेसिनों में छिपे हुए हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज करना है, जिनकी अभी तक पूरी तरह से खोज नहीं हुई है; ऐसा करके देश की आयातित कच्चे तेल पर भारी निर्भरता को कम किया जा सकेगा।
हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) और तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) इस क्षेत्र में खोज गतिविधियों का नेतृत्व करेंगे। इन गतिविधियों को अत्याधुनिक भूकंपीय सर्वेक्षणों (seismic surveys) और परिष्कृत ड्रिलिंग तकनीकों की मदद से अंजाम दिया जाएगा। निकट भविष्य में, अंडमान बेसिन, महानदी बेसिन और राजस्थान में स्थित कई नए ब्लॉकों को बोली के लिए उपलब्ध कराए जाने की संभावना है।
अधिकारियों ने बताया कि यह एक नई और ज़ोरदार पहल है, जो ऐसे समय में अत्यंत आवश्यक है जब पूरी दुनिया बढ़ती ऊर्जा लागतों से जूझ रही है और भारत में भी ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। यदि ये खोजें सफल रहीं, तो इससे घरेलू उत्पादन में वृद्धि होगी और सरकार के 'ऊर्जा स्वतंत्रता' के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इस निर्णय को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, और ऊर्जा क्षेत्र ने इसका स्वागत किया है।




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