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ये तारीखें न चूकें! नए इनकम टैक्स एक्ट के तहत ITR फाइल करने की डेडलाइन — 2026 में आपको जो कुछ भी जानना ज़रूरी है

बजट 2026 ने ITR फाइल करने की अलग-अलग डेडलाइन पेश की हैं — वेतनभोगी टैक्सपेयर्स के लिए 31 जुलाई, बिना ऑडिट वाले व्यवसायों के लिए 31 अगस्त, और ऑडिट वाले मामलों के लिए 31 अक्टूबर। नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 केवल टैक्स वर्ष 2026-27 और उसके बाद से लागू होगा।

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By Jigyasa Sain | Faridabad, Haryana | खबरें - 22 April 2026


दो एक्ट, दो समय-सीमाएँ — इस साल क्या नया है: मौजूदा इनकम टैक्स एक्ट 1961 का ढाँचा अभी भी 31 जुलाई, 2026 को जमा किए गए रिटर्न पर लागू होगा, जो AY 2026-27 से संबंधित हैं। नए प्रावधान केवल टैक्स वर्ष 2026-27 में अर्जित आय पर लागू होंगे, जिनकी फाइलिंग 2027 में होनी है।

FY 2025-26 (AY 2026-27) के लिए पूरी डेडलाइन तालिका:

  • वेतनभोगी व्यक्ति, पेंशनभोगी, कैपिटल गेन्स - ITR-1 / ITR-2 - 31 जुलाई 2026
  • नॉन-ऑडिट व्यवसाय और पेशेवर - ITR-3 / ITR-4 - 31 अगस्त 2026 (नया)
  • टैक्स ऑडिट मामले - ITR-3 / ITR-5 - 31 अक्टूबर 2026
  • ट्रांसफर प्राइसिंग मामले - ITR - 30 नवंबर 2026
  • विलंबित / देर से फाइलिंग - सभी - 31 दिसंबर 2026
  • संशोधित रिटर्न - सभी - 31 दिसंबर 2026
  • अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) - सभी - 31 मार्च 2031 तक

मुख्य बदलाव—व्यवसायों के लिए बढ़ी हुई डेडलाइन: नॉन-ऑडिट व्यवसाय और पेशेवर टैक्सपेयर, साथ ही ऐसी फर्मों के पार्टनर, अब पहले की 31 जुलाई की डेडलाइन के बजाय 31 अगस्त तक रिटर्न फाइल कर सकेंगे। इस बदलाव का उद्देश्य कंप्लायंस के दबाव को कम करना है, खासकर छोटे व्यवसायों और पेशेवरों के लिए। संशोधित रिटर्न विंडो का विस्तार: बजट 2026 में घोषित एक और बड़ी राहत ITRs को संशोधित करने के लिए अतिरिक्त समय है। पहले, संशोधन केवल 31 दिसंबर तक ही करने की अनुमति थी। अब, टैक्सपेयर एक छोटी सी फीस देकर 31 मार्च तक अपने रिटर्न को संशोधित कर सकते हैं। पोर्टल चेतावनी—सही टैब चुनें: इस वर्ष के इनकम टैक्स पोर्टल पर दो अलग-अलग टैब हैं: एक FY 2025-26 के लिए (जो इनकम टैक्स एक्ट 1961 द्वारा शासित है) और दूसरा टैक्स वर्ष 2026-27 के लिए (जो नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 द्वारा शासित है)। गलत टैब चुनने पर आपकी फाइलिंग अमान्य हो जाएगी। देरी से फाइल करने पर जुर्माना: आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 428 के अनुसार, यदि कुल आय ₹5 लाख से अधिक नहीं है, तो देरी से फाइल करने पर ₹1,000 का शुल्क निर्धारित है; और अन्य सभी मामलों में यह शुल्क ₹5,000 है।

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