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16 अप्रैल, 2026 को, हाई-प्रोफाइल TCS नासिक यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण मामले में एक नया मोड़ आया। मामले के मुख्य आरोपियों में से एक, शफी शेख ने दावा किया कि नासिक रोड सेंट्रल जेल के भीतर अन्य कैदियों ने उसके साथ मारपीट की।
शेख ने यह दावा अदालत की 'इन-कैमरा' सुनवाई के दौरान किया, जहाँ उसे और उसके सह-आरोपी रज़ा मेमन को पेश किया गया था। उसने अब जेल के भीतर पुलिस सुरक्षा की मांग की है। अदालत ने दोनों आरोपियों को 18 अप्रैल तक के लिए तीन दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि विभिन्न मामलों में उनसे पूछताछ की जा सके।
इस मामले में नौ FIRs दर्ज की गई हैं, जिनमें TCS नासिक के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ यौन शोषण, छेड़छाड़, मानसिक उत्पीड़न और महिला (तथा कम से कम एक पुरुष) कर्मचारियों के जबरन धर्मांतरण के प्रयासों के आरोप शामिल हैं। मामले की जांच एक विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है; कुछ आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
TCS ने संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और स्पष्ट किया है कि उत्पीड़न के मामलों में उसकी 'शून्य सहनशीलता' (Zero Tolerance) की नीति है। BPO यूनिट में कार्यस्थल पर व्यापक कदाचार के आरोपों के चलते इस मामले को काफी सुर्खियां मिली हैं।




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