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इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) द्वारा प्रायोजित ओडिशा ग्रामीण बैंक ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है। यह बयान तब आया जब एक आदिवासी व्यक्ति, जीतू मुंडा, अपनी दिवंगत बहन कालरा मुंडा के खाते से लगभग ₹19,300-20,000 निकालने के लिए क्योंझर जिले की मालीपोसी शाखा में अपनी बहन का कंकाल लेकर पहुँच गया।
बैंक ने एक बयान में कहा कि यह बात गलत है कि बैंक कर्मचारियों ने मुंडा से "खाताधारक को साथ लाने" के लिए कहा था। बैंक ने बताया कि शाखा अधिकारियों ने उन्हें समझाया था कि किसी मृत व्यक्ति के खाते का निपटारा केवल आवश्यक दस्तावेजों, जैसे कि मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र के आधार पर ही किया जा सकता है। यह व्यक्ति सबसे पहले 27 अप्रैल को बैंक आया था, लेकिन बैंकिंग नियमों की जानकारी न होने और निराशा के कारण वह बाद में अपनी बहन की कब्र खोदकर निकाली गई लाश के साथ बैंक लौट आया।
स्थानीय प्रशासन अब मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में तेज़ी ला रहा है, ताकि मुंडा को उनकी राशि मिल सके। पुलिस ने भी मदद की पेशकश की है, और बैंक ने भी इस दावे के निपटारे में तेज़ी लाने का आश्वासन दिया है। इस विचित्र मामले ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में वित्तीय जागरूकता को लेकर भी कुछ सवाल खड़े किए हैं।




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