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जाने-माने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जब वे अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल से उबर गए। लद्दाख के इस इनोवेटर और शिक्षा सुधारक ने NEET पेपर लीक के मुद्दे सहित परीक्षा में गड़बड़ियों का विरोध कर रहे छात्रों के समर्थन में उपवास किया था।
उनकी टीम ने पुष्टि की कि लद्दाख के पहाड़ों पर लौटने से पहले वांगचुक सबसे पहले राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे। पेपर लीक और उससे जुड़े सुधारों के खिलाफ़ सख़्त कदम उठाने के बारे में सरकार से आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने 24 जुलाई की देर रात अपना उपवास तोड़ा था।
SECMOL वैकल्पिक स्कूल की स्थापना और 'आइस स्तूप' (Ice Stupa) प्रोजेक्ट्स की शुरुआत करने के लिए मशहूर वांगचुक ने अस्पताल के स्टाफ़ को उनकी देखभाल के लिए धन्यवाद दिया। उनके शांतिपूर्ण विरोध और उसके बाद ठीक होने की प्रक्रिया ने सबका ध्यान खींचा है, जिससे शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों के प्रति उनकी लगातार प्रतिबद्धता उजागर हुई है। यह कार्यकर्ता अब लद्दाख के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अपना काम फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।




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