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म्यूचुअल फंड की 7 जानलेवा गलतियाँ जो चुपके से आपके रिटर्न को खत्म कर रही हैं – इनसे बचें और अपनी दौलत को तेज़ी से बढ़ते देखें!

निवेशक अक्सर अनजाने में "भीड़ की नकल करके," मार्केट गिरने पर डरकर, खर्चों पर ध्यान न देकर, और म्यूचुअल फंड के लक्ष्य तय न करके अपने म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन को नुकसान पहुँचाते हैं। इन गलतियों से बचकर, निवेशक अपनी दौलत बनाने की क्षमता को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।

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By Jigyasa Sain | Faridabad, Haryana | व्यापार - 27 April 2026


कई निवेशक अपनी व्यवहारिक गलतियों के कारण म्यूचुअल फंड निवेश से मिलने वाले रिटर्न को कम कर देते हैं। यहाँ बताया गया है कि क्या नहीं करना चाहिए:

  • फंड्स की नकल करना (Funds Herding): हाल ही में अच्छा रिटर्न देने वाले फंड्स में निवेश करना नासमझी हो सकती है, क्योंकि पिछला रिटर्न हमेशा बना नहीं रहता। ऐसे फंड्स चुनें जिनका प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा हो, जिनके फंड मैनेजर अनुभवी हों, और जो आपकी ज़रूरतों के हिसाब से सही हों।
  • मार्केट टाइमिंग: मार्केट के सबसे ऊँचे और सबसे निचले स्तर का सही अंदाज़ा लगाना मुश्किल होता है। निवेश शुरू करने के लिए "सबसे अच्छे" समय का इंतज़ार करने के बजाय, SIP के ज़रिए निवेशित रहें ताकि आपको "रूपी-कॉस्ट एवरेजिंग" का फायदा मिल सके।
  • मार्केट में गिरावट के दौरान SIP रोकना: यह एक बड़ी गलती है—इससे आप मार्केट की रिकवरी (वापसी) का फायदा उठाने से चूक जाते हैं, जो लंबे समय के रिटर्न का एक बड़ा हिस्सा होती है। मार्केट में गिरावट के समय अपनी SIP की रकम बढ़ाएँ या उसे जारी रखें।
  • फंड की फीस पर ध्यान न देना: ज़्यादा फीस होने से रिटर्न कम हो जाता है। कम फीस वाले "डायरेक्ट प्लान" चुनें।
  • डायवर्सिफिकेशन की कमी या गलत फंड चुनना: किसी एक ही जगह पर बहुत ज़्यादा निवेश करना, या कम समय के लिए इक्विटी फंड में निवेश करना—ये दोनों ही जोखिम और रिटर्न के लिहाज़ से सही तालमेल नहीं हैं।
  • लक्ष्यों या जोखिम प्रबंधन की कमी: अपने लक्ष्य, निवेश की समय-सीमा, और जोखिम उठाने की क्षमता (risk tolerance) पहले से तय करें।
  • भावनात्मक फैसले: घबराकर शेयर बेचना (Panic selling) या "FOMO" (कुछ छूट जाने के डर) के चलते बार-बार फंड बदलना—ये सभी आपके रिटर्न को नुकसान पहुँचाते हैं।

एक व्यवस्थित और लक्ष्यों पर आधारित योजना का पालन करें, हर साल अपनी योजना की समीक्षा करें, और अपनी खास ज़रूरतों के हिसाब से रणनीति बनाने के लिए किसी वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। म्यूचुअल फंड के मामले में, समय देना और एक अनुशासित नज़रिया रखना ही सबसे ज़्यादा फायदेमंद साबित होता है।

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