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वॉल स्ट्रीट एक 800 साल पुराने गणितीय सिद्धांत का सहारा ले रहा है। इस सिद्धांत के तहत, 50 प्रतिशत के 'फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल' के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि S&P 500 में चल रहे सुधार (correction) के दौरान कीमतें कहाँ तक नीचे गिर सकती हैं।
यह एक ऐसा टूल है जो 13वीं सदी के लियोनार्डो फिबोनाची अनुक्रम (sequence) पर आधारित है। यह टूल संकेत देता है कि इंडेक्स अप्रैल 2025 के निचले स्तरों और जनवरी 2026 के रिकॉर्ड स्तरों के बीच हुई सारी बढ़त को गँवा सकता है, और अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच सकता है। इसका अहम स्तर लगभग 5,980 है—जो मौजूदा बंद भाव (closing levels) से लगभग 9 प्रतिशत नीचे है—और यह जून के मध्य में बने निचले स्तर से जुड़ा हुआ है।
शेयर बाज़ार के चार्ट पर नज़र रखने वाले विश्लेषक (chart watchers) अक्सर कीमतों में गिरावट या 'पुलबैक' के दौरान खरीदारी के अच्छे मौके पहचानने के लिए फिबोनाची रिट्रेसमेंट का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि फिबोनाची स्तरों को अक्सर 'मनोवैज्ञानिक सपोर्ट एरिया' (psychological support areas) के तौर पर देखा जाता है, जहाँ बिकवाली का दबाव कम होने की संभावना होती है। 50% का रिट्रेसमेंट होना कोई पक्की गारंटी नहीं है, लेकिन अतीत में जब भी बाज़ार में भारी उथल-पुथल मची थी, तब इस 50 प्रतिशत के रिट्रेसमेंट स्तर ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। बढ़ती अनिश्चितताओं के माहौल में, S&P 500 को लगातार चार हफ़्तों तक नुकसान झेलना पड़ा है; ऐसे में ज़्यादातर निवेशक इस अनुपात पर पैनी नज़र रखेंगे, ताकि यह देख सकें कि गिरावट का यह सिलसिला कब थमेगा और इंडेक्स कब स्थिर होना या उबरना शुरू करेगा।




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