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लोकसभा से पास हुआ 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026' कई अहम बदलाव लाता है। यह 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट' में संशोधन करता है ताकि सरकार को ऐसे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों को नोटिफाई करने की छूट मिल सके जिन पर भविष्य में चार्ज लग सकते हैं। इससे व्यापारियों के लिए UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू हो सकता है, जबकि यूज़र्स के लिए यह मुफ़्त बना रहेगा। निवेशकों के लिए, यह बिल योग्य ऑफशोर इन्वेस्टमेंट फंड और फंड मैनेजरों की शर्तों को आसान बनाता है और भारत में फंड मैनेजमेंट को बढ़ावा देने के लिए कंप्लायंस की ज़रूरतों को कम करता है। यह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और 'बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स' के लिए सरकारी सिक्योरिटीज़ से मिलने वाले ब्याज और कैपिटल गेन्स पर टैक्स छूट भी देता है। अतिरिक्त राहतों में REIT और InvIT यूनिट होल्डर्स के लिए डिविडेंड पर टैक्स छूट जारी रखना, 2041 तक इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के लिए टैक्स इंसेंटिव बढ़ाना, और बिना तराशे हीरों (रफ़ डायमंड) की ट्रेडिंग और डेटा सेंटर्स से जुड़ी छूट शामिल हैं। इसका कुल मकसद टैक्स से जुड़ी निश्चितता बढ़ाना और ग्लोबल कैपिटल व मैन्युफैक्चरिंग इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करना है।




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