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नई दिल्ली: 1 अप्रैल, 2026 से, भारत भर में सैलरी के ढांचे में एक बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। यह बदलाव 'Code on Wages, 2019' के तहत होगा, जो चार एकीकृत लेबर कोड्स का ही एक हिस्सा है।
नए नियम के मुताबिक, किसी भी कर्मचारी की कुल CTC (कंपनी की कुल लागत) का कम से कम 50% हिस्सा उसकी बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता (DA) और रिटेनिंग अलाउंस (बरकरार रखने वाला भत्ता) से मिलकर बना होना चाहिए। पहले ज़्यादातर कंपनियाँ वैधानिक योगदान (Statutory contributions) को कम करने के लिए बेसिक सैलरी को सिर्फ़ 30-40% तक रखती थीं, और बाकी की रकम को HRA (मकान किराया भत्ता) और अन्य विशेष भत्तों के रूप में देती थीं।
अगर भत्तों (Allowances) की रकम कुल वेतन के 50% से ज़्यादा हो जाती है, तो उस अतिरिक्त रकम को अपने-आप ही 'वेतन' (Wages) मान लिया जाएगा। इससे प्रॉविडेंट फंड (PF), ग्रेच्युटी, ओवरटाइम और अन्य लाभों की गणना का आधार मज़बूत होगा। इसकी वजह से, ज़्यादातर कर्मचारियों के PF योगदान की राशि बढ़ जाएगी और उनकी 'टेक-होम पे' (हाथ में आने वाली सैलरी) कम हो जाएगी, लेकिन लंबे समय के रिटायरमेंट फ़ायदे बढ़ जाएँगे। एम्प्लॉयर्स को यह सलाह दी गई है कि वे पेनल्टी से बचने के लिए जल्द से जल्द अपने पे स्ट्रक्चर में बदलाव लागू करें।
इस बदलाव से कर्मचारियों की सैलरी और सोशल सिक्योरिटी में कुछ एकरूपता आएगी। अगले महीने, कर्मचारियों को अपनी अपडेटेड सैलरी स्लिप मिलने की उम्मीद है।




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