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यह R.G. चंद्रमोगन के साधारण शुरुआत से डेयरी टाइकून बनने की एक अद्भुत कहानी है। वे तमिलनाडु के एक स्कूल से पढ़ाई बीच में ही छोड़ने वाले व्यक्ति हैं और उन्होंने कोयले के डिपो में नौकरी की, जहाँ उन्हें महीने में सिर्फ़ ₹65 मिलते थे। साथ ही, वे हाथगाड़ी से आइसक्रीम बेचकर मामूली मुनाफ़े पर गुज़ारा करते थे। उन्होंने अपने पिता की डेयरी बिज़नेस शुरू करने की कोशिश को अपनी कड़ी मेहनत और बिज़नेस स्किल्स के दम पर 'हैटसन एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड' के रूप में एक बड़ी कंपनी में बदल दिया।
आज हैटसन एग्रो भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर की डेयरी कंपनियों में से एक है, जिसकी वैल्यूएशन ₹20,000 करोड़ है। इस साम्राज्य में अरुण आइसक्रीम और मिल्की मिस्ट जैसे बहुत पसंद किए जाने वाले ब्रांड शामिल हैं और यह कंपनी कई राज्यों में मौजूद है, जिसने एक बड़ा डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम तैयार किया है। चंद्रमोगन की कहानी हिम्मत, डेयरी से जुड़े नए और बेहतर प्रोडक्ट्स (वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स) बनाने की सोच और भारत की तेज़ी से बढ़ती डेयरी इंडस्ट्री में मौकों को पहचानने की काबिलियत का सबूत है। इसकी शुरुआत उनके बैग में रखे चीज़ के एक छोटे से पैकेट से हुई थी और आज, एक अरब डॉलर से ज़्यादा की वैल्यू वाली उनकी कहानी देश के लाखों नए उद्यमियों को प्रेरित कर रही है।




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