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भारतीय स्टार्टअप्स ने महंगे LLMs को छोड़कर छोटे SLMs को अपनाया! भारी लागत में कटौती और बुलेटप्रूफ डेटा प्राइवेसी – एक ऐसा स्मार्ट AI बदलाव जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी!

भारतीय स्टार्टअप्स अब महंगे और क्लाउड-आधारित 'लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स' (LLMs) के एक किफायती विकल्प के तौर पर, 'स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स' (SLMs) पर ज़्यादा निर्भर हो रहे हैं। ये SLMs आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक छोटा और कॉम्पैक्ट रूप हैं, जिनमें 1 से 15 अरब (बिलियन) पैरामीटर्स होते हैं।

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By Jigyasa Sain | Faridabad, Haryana | व्यापार - 31 March 2026


भारतीय स्टार्टअप्स अब महंगे और क्लाउड-आधारित 'लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स' (LLMs) के एक किफायती विकल्प के तौर पर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एक छोटे और कॉम्पैक्ट रूप—जिसे 'स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स' (SLMs) के नाम से जाना जाता है—पर ज़्यादा निर्भर हो रहे हैं।

हाल की रिपोर्टों के अनुसार, Fintech, HealthTech और LegalTech स्टार्टअप्स अब SLMs को एक ऐसे माध्यम के रूप में अपना रहे हैं, जिससे वे भारतीय स्टार्टअप्स के सामने आने वाली तीन सबसे बड़ी समस्याओं का समाधान कर सकें। ये समस्याएं हैं: क्लाउड सेवाओं की भारी लागत, देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) की कमी, और खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी। इसके अलावा, 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट' के तहत डेटा प्राइवेसी (निजता) से जुड़े सख्त नियम भी लागू किए गए हैं। SLMs को अपनाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उस रूप को अपनाने का एक व्यावहारिक और समझदारी भरा तरीका है, जिसे विशेष रूप से भारतीय बाज़ार की ज़रूरतों के हिसाब से ही डिज़ाइन किया गया है।

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