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ज़रा सोचिए… एक तरफ़ दुबई—चमचमाती सड़कें, परफेक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, वर्ल्ड-क्लास पब्लिक सुविधाएं। और दूसरी तरफ़ मुंबई—भारत की आर्थिक राजधानी, जहां हर दिन करोड़ों सपने सांस लेते हैं। अब चौंकाने वाला सच सुनिए— दुबई की इकोनॉमी करीब 117 बिलियन डॉलर की है, जबकि मुंबई की GDP लगभग 278 बिलियन डॉलर बताई जाती है। यानी कागज़ों पर मुंबई, दुबई से दो गुना से भी बड़ी अर्थव्यवस्था है! लेकिन सवाल ये है— अगर पैसा ज्यादा है… तो सड़कें, ट्रांसपोर्ट, सफाई और पब्लिक सिस्टम में फर्क इतना बड़ा क्यों दिखता है? यहीं से असली कहानी शुरू होती है।
दुबई हमें दिखाता है कि प्लानिंग + मजबूत गवर्नेंस + लॉन्ग-टर्म विज़न, क्या कमाल कर सकते हैं।कम आबादी, साफ नियम और तेज़ फैसले— यही दुबई की असली ताकत है।
वहीं मुंबई की कहानी अलग है। यह शहर हर दिन जनसंख्या के भारी दबाव से जूझता है, फिर भी देश की आर्थिक रीढ़ बना हुआ है। यह शहर हार नहीं मानता— चाहे बारिश हो, ट्रैफिक हो या सिस्टम की कमी। ये तुलना किसी शहर को नीचा दिखाने के लिए नहीं है। ये एक सवाल है— जब आर्थिक ताकत मौजूद है, तो आम आदमी की जिंदगी आसान क्यों नहीं बन पा रही? मुंबई में क्षमता की कमी नहीं है… कमी है तो सिर्फ़ बेहतर प्लानिंग और सही इस्तेमाल की। और यही वजह है कि कहा जाता है— मुंबई का असली पोटेंशियल अभी सामने आना बाकी है। जिस दिन वो जाग गया, उस दिन मुकाबला सिर्फ़ दुबई से नहीं… पूरी दुनिया से होगा। अब आपको क्या लगता हैं मुंबई बेस्ट हैं या दुबई ? अपनी राय कमेंट में बताएगा जरूर।




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