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क्या हमारा देश वाक़ई गरीब है, या अमीर चुप हैं? आख़िर ये ‘अमीर बोरिंग’ लोग 100 करोड़ कैसे बना जाते हैं? आख़िर जो अमीर हैं वो सोशल मीडिया पर क्यों नहीं दिखते? क्या आप जानते हैं कुछ ऐसे आंकड़े हैं जो आपको सच में हैरान कर देंगे। भारत में करीब 66 हज़ार लोग ऐसे हैं जिनकी नेट वर्थ 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा है। अब ज़्यादातर लोग क्या सोचते हैं? ये होंगे बड़े-बड़े सेलिब्रिटी, या फिर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, या कोई स्टार्टअप फाउंडर जो रातों-रात अमीर बन गया।
पहला नंबर
लकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।असल में, इन अमीर लोगों में से करीब 70% लोग बिज़नेस ओनर हैं। कोई फिल्म स्टार नहीं, कोई यूट्यूबर नहीं। बल्कि — फैक्ट्री चलाने वाले, केमिकल बनाने वाले, फार्मा कंपनियों के मालिक, ऑटो पार्ट्स सप्लायर, और EPC जैसे ठेकेदार। ये वो बिज़नेस हैं जिन्हें लोग अक्सर कहते हैं —“बोरिंग बिज़नेस” लेकिन इन बोरिंग बिज़नेस में होता है — स्टेबल कमाई, लगातार कैश फ्लो, और सालों-साल की कंपाउंडिंग।
अब दूसरे नंबर पर आते हैं —
करीब 15% रियल एस्टेट से जुड़े परिवार। ये वो लोग हैं जो पिछले 20–30 सालों से चुपचाप प्रॉपर्टी में काम कर रहे हैं। शुरुआत में इन्होंने थोड़ी-थोड़ी ज़मीन खरीदी, उस ज़मीन को रोके रखा, और सही समय आने का इंतज़ार किया। कई लोगों ने पुरानी इमारतों का री-डेवलपमेंट किया, कुछ ने वेयरहाउस, तो कुछ ने इंडस्ट्रियल पार्क बनाए। हर साल कोई बड़ा धमाका नहीं हुआ, ना ही रातों-रात करोड़पति बने। बस — साल दर साल कीमत बढ़ती गई, किराए से आमदनी आती रही, और प्रॉपर्टी की वैल्यू कंपाउंड होती रही। इसलिए इनकी दौलत अचानक नहीं दिखी, लेकिन जब दिखी —तो सबको हैरान कर गई। यही वजह है कि आज ये परिवार बेहद अमीर हैं, क्योंकि इन्होंने सब्र रखा, समय दिया, और शोर नहीं मचाया।
अब तीसरा ग्रुप —
सिर्फ़ 10% लोग ऐसे हैं जो प्योर स्टॉक मार्केट इन्वेस्टर हैं। लेकिन ध्यान दीजिए — ये लोग रोज़ ट्रेडिंग नहीं करते थे। इन्होंने सालों तक कुछ चुनिंदा कंपनियों में भरोसा रखा। सबसे बड़ी बात — इन्होंने अपनी लाइफस्टाइल को कंट्रोल में रखा। कमाया ज़्यादा, खर्च किया कम। और अब जो सबसे ज़्यादा दिखते हैं — सेलिब्रिटी और पब्लिक फिगर? असल में वो 5% से भी कम हैं। मतलब साफ़ है — दिखावा दौलत नहीं होता। इन ज़्यादातर अमीर लोगों की कुछ बातें कॉमन हैं:
* उम्र 45 से 65 साल
* सादा जीवन
* कोई कोर्स नहीं बेचते
* महंगी कारों का दिखावा नहीं
* और अटेंशन के पीछे नहीं भागते
एक और बड़ी सच्चाई — इनमें से 55% से ज़्यादा लोग मिडिल क्लास से आए हैं। ये जन्म से अमीर नहीं थे। इनकी सफलता का राज़ किस्मत नहीं था। राज़ था — ओनरशिप और समय। अब एक कड़वी सच्चाई सुनिए: सिर्फ़ सैलरी से वहाँ पहुँचना लगभग नामुमकिन है। मोटिवेशनल रील्स देखने से पैसा कंपाउंड नहीं होता। 100 करोड़ रुपये बनाने के लिए 20–30 साल का सब्र चाहिए। और सबसे दिलचस्प बात — ये सबसे अमीर लोग आपको सोशल मीडिया पर शायद ही दिखें। क्योंकि वो रील पोस्ट करने में नहीं, बैलेंस शीट चलाने में बिज़ी हैं। याद रखिए — ओनरशिप से कंपाउंडिंग होती है। शोर से नहीं।




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