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सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते शुरुआती कारोबार में ही Sensex 900 से ज़्यादा अंक नीचे गिर गया। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईंधन की मांग कम करने के उद्देश्य से सरकार ने लोगों से अपील की थी कि वे "जब तक बहुत ज़रूरी न हो" पेट्रोल, डीज़ल या गैस का इस्तेमाल न करें; इस अपील के बाद ModiFarm Ltd. के शेयरों में 5% तक की गिरावट दर्ज की गई।
आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं के चलते वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में अभूतपूर्व उछाल आया है, जिससे महंगाई और भारत के आयात खर्च को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत सरकार की ओर से सोने की खरीदारी और गैर-ज़रूरी यात्राओं को टालने की अपील ने निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। निवेशकों को डर है कि इससे उपभोग और आर्थिक गतिविधियों में और भी ज़्यादा सुस्ती आ सकती है, जैसा कि PM मोदी ने भी इस ओर इशारा किया है।
Nifty में भी 250 से ज़्यादा अंकों की गिरावट दर्ज की गई। तेल एवं गैस, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। बाज़ार विश्लेषकों का कहना है कि राजनीतिक अनिश्चितता और घरेलू स्तर पर बचत के उपायों (austerity measures) के मिले-जुले असर ने निवेशकों के बीच जोखिम उठाने से बचने (risk aversion) का माहौल बना दिया है। हालाँकि, सरकार का मानना है कि यह सुनिश्चित करने के लिए समय पर कदम उठाए जाएँगे कि भारत इस संकट का सामना कर सके। बड़े बाज़ार भी घाटे में रहे, क्योंकि बाज़ारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ था।




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