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Twitter के CEO (एलन मस्क के आने से पहले), पराग अग्रवाल ने एक ज़बरदस्त वापसी की है। IIT बॉम्बे के इस पूर्व छात्र ने महज़ दो साल में लगभग ₹19,000 करोड़ का कारोबार खड़ा कर दिया है।
यह स्टार्टअप, जो आधुनिक तकनीक (ऐसा कंटेंट जिसे अक्सर AI या बिज़नेस सॉफ़्टवेयर से जोड़ा जाता है) पर ज़ोर देता है, निवेशकों का ज़बरदस्त ध्यान खींचने के साथ-साथ तेज़ी से आगे बढ़ा है। अग्रवाल एक बहुत ही जानकार इंजीनियर थे और उन्होंने Twitter प्लेटफ़ॉर्म को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाया था; यह उनकी सफलता के पीछे के मुख्य कारणों में से एक है।
यह सफलता टेक इंडस्ट्री में लचीलेपन की उस सच्चाई को सामने लाती है, जहाँ पुराने लीडर्स अक्सर नए और सफल उद्यम खड़े करते हैं। इंडस्ट्री पर नज़र रखने वालों का मानना है कि जो पेशेवर अपने करियर में अचानक आए बदलावों के बाद वापसी करना चाहते हैं, उन्हें अग्रवाल के अनुभव से काफ़ी प्रेरणा मिलती है।
मस्क ने Twitter में किए गए बदलावों के पीछे रणनीतिक मतभेदों को मुख्य कारण बताया था। एक 'वापसी करने वाले हीरो' (comeback kid) के तौर पर अग्रवाल का उभार, सिलिकॉन वैली की लीडरशिप और उद्यमिता की कहानियों में एक नया अध्याय जोड़ता है। इस स्टार्टअप का सटीक नाम और कार्यक्षेत्र अभी भी टेक जगत में काफ़ी चर्चा का विषय बना हुआ है।




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