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एक साथ कई काम करने की उसकी काबिलियत और जिस अनुशासन के साथ वह काम करता है, इन्हीं बातों ने अहमदाबाद के नागरिक दीपक पांडे की तरफ इंटरनेट की दुनिया का ध्यान खींचा है। यह PhD स्कॉलर एक कंपनी में 9 से 5 तक फुल-टाइम नौकरी करता है, उसके बाद देर रात तक बाइक टैक्सी चलाता है, अपनी PhD की पढ़ाई भी करता है, वीडियो एडिट करता है, अपने कंटेंट के लिए खुद ही लिखता है, कंटेंट बनाता है और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करता है।
हाल ही में दीपक ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें उसने दिखाया है कि कैसे उसके इस व्यस्त शेड्यूल ने उसे और ज़्यादा काबिल बनाया है और वह अपनी ज़िंदगी से ज़्यादा खुश है। पहले वह एक ही ढर्रे पर चल रहा था, लेकिन जब उसने कई चुनौतियाँ स्वीकार कीं, तो उसकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई। उसकी यह कहानी आज की 'गिग इकॉनमी' (अस्थायी नौकरियों वाली अर्थव्यवस्था) में बहुत ज़्यादा प्रासंगिक लगती है। करियर बनाने, पढ़ाई करने और अपना कुछ नया शुरू करने की कोशिशों में लगे हज़ारों युवा भारतीयों को उसकी कहानी से बहुत जुड़ाव महसूस होता है।
उसकी मेहनत भरी जीवनशैली और काम-काज व निजी ज़िंदगी के बीच बनाए गए संतुलन की कई लोग तारीफ़ करते हैं, लेकिन कुछ लोगों को इसे लेकर चिंता भी होती है। इसके बावजूद, दीपक की कहानी आज के भारत में लगन, समय-प्रबंधन और निरंतर आत्म-सुधार के प्रति समर्पण का एक जीता-जागता प्रमाण है।




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