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बम फटने में रह गए थे 3 सेकंड तभी पहुँचे हनुमान जी ! 🙏
क्या थी वो 1998 की घटना जिसे इतिहास लिखने वालो ने पन्नो में दबा दिया ? आइए आपको बताते हैं सच्ची घटना पर आधारित हमारे हनुमान जी के होने के सबूत की कहानी।
हनुमान गढ़ी

हनुमान गढ़ी अयोध्या के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। यह एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है और भक्तगण यहाँ पहुँचने के लिए 76 सीढ़ियाँ चढ़ते हैं। यह मंदिर एक किले के आकार का है, जिसके अंदर हनुमान जी की मूर्ति प्रेम और शक्ति से जगमगाती है। लोग श्री रामजी जन्मभूमि जाने से पहले हनुमान जी का आशीर्वाद लेने के लिए इस मंदिर में आते हैं।
यह विशेष क्यों है?

ऐसा माना जाता है कि श्री रामजी ने हनुमानजी को अयोध्या की रक्षा का दायित्व सौंपा था। और ये जिम्मेदारी हनुमान जी आजतक उठा रहे हैं।
1998 में खतरनाक खतरा

1998 में अयोध्या में उत्तर प्रदेश पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि अयोध्या में भारी मात्रा में खतरनाक विस्फोटक आरडीएक्स लाया जा रहा है। पुलिस ने ज़्यादातर विस्फोटक रोक लिया, लेकिन एक आतंकवादी हनुमान गढ़ी मंदिर में घुस गया। उसकी एक क्रूर योजना थी। उसने स्वयं को बम निरोधक दल के सदस्य के रूप में मंदिर में एक टाइम बम छिपा दिया था। उसने एक टाइमर सेट किया ताकि बम फट जाए और मंदिर नष्ट हो जाए। पुलिस ने भागते हुए उस आतंकवादी को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने कबूल किया कि बम बस एक मिनट में फटने वाला था! सब डर गए थे। मंदिर श्रद्धालुओं से भरा हुआ था और समय तेज़ी से निकल रहा था। तब एक बहादुर पुलिस अधिकारी, इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा, अपनी टीम के साथ मंदिर के अंदर गए। उन्होंने मंदिर को खाली करा दिया गया, पुलिस ने मंदिर के हर कोने की तलाशी ली। उन्होंने हर कमरे, गलियारे और यहां तक कि मूर्तियों के पीछे भी देखा। उन्हें बम जैसी कोई चीज़ नहीं मिली। समय बीत रहा था और हर कोई चिंतित था।
माहौल तनावपूर्ण था, मानो रामायण का कोई दृश्य हो जहाँ हनुमानजी कठिन चुनौतियों का सामना करते हैं, लेकिन हार नहीं मानते। जैसे लंका में सीता की खोज करते समय हनुमानजी शांत रहे, वैसे ही पुलिस भी अपना ध्यान केंद्रित रखे हुए थी।अचानक कुछ अजीब हुआ। पुलिस ने मंदिर के प्रांगण में ठंडे पानी की टंकी के पास एक छोटा सा बंदर बैठा देखा। यह वही जगह थी जहाँ बम छिपा था! बंदर अपने हाथों में दो बिजली के तार पकड़े हुए था और उन्हें ऐसे चबा रहा था जैसे वे फल हों। बन्दर बम से जुड़े तारों से खेल रहा था। उन्हें चबाने से उसने उन तारों को काट दिया जिनसे बम फट सकता था। बंदर डरा हुआ या भ्रमित नहीं लग रहा था - ऐसा लग रहा था जैसे वह जानता था कि वह क्या कर रहा है। पुलिस हैरान रह गई। उन्होंने बंदर का ध्यान भटकाने के लिए केले फेंके ताकि वे मशीन की जाँच कर सकें। लेकिन उस बंदर ने केले नहीं लिए वहा से चला गया तब बम निरोधक दल ने डिस्पेंसर खोला। अंदर उन्हें बम मिला—लेकिन अब वह ख़तरनाक नहीं था! बंदर ने तार काट दिए थे, इसलिए टाइमर तीन सेकंड पर रुक गया था। जी हाँ सिर्फ 3 सेकंड पर तभी पुलिस इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा ने उस बंदर को देखा वो मंदिर के शिखर पर रखे कलश पर हाथ फेर रहा था जिसे देखकर पूरी पुलिस टीम और इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा ने उन्हें दंडवत प्रणाम किया।
जैसा कि तुलसीदास जी ने कहा:
"संकट मोचन हनुमान की जय, पवन पुत्र की जय!"
यह दोहा बिल्कुल सही बैठता है, क्योंकि बंदर स्वयं हनुमानजी लग रहे थे, जो सभी को एक बड़ी आपदा से बचा रहे थे।
जय श्री राम ! 🙏




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