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भानगढ़ किला, भारत के राजस्थान राज्य के अलवर ज़िले में स्थित भानगढ़ गाँव में मौजूद 16वीं सदी के एक किले के खंडहर हैं। यह जयपुर से 80-85 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम और दिल्ली से 220-250 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। यह अरावली पर्वतमाला की तलहटी में और सरिस्का टाइगर रिज़र्व की सीमा पर बना हुआ है। यह किला राजा भगवंत दास ने अपने बेटे माधो सिंह के लिए बनवाया था। अभी यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की देखरेख में है। यहाँ की एक खास बात यह है कि किले के प्रवेश द्वार पर एक बोर्ड लगा है, जिस पर साफ-साफ लिखा है कि सूरज उगने से पहले या सूरज डूबने के बाद किले में एंट्री सख्त मना है। यहाँ रात में रुकना भी मना है। स्थानीय कहानियों के अनुसार, इस किले के भूतिया होने की वजह दो चीज़ों में से कोई एक हो सकती है: या तो किसी तांत्रिक (काला जादू करने वाले) का श्राप, जिसे राजकुमारी रत्नावती ने निकाल दिया था; या फिर साधु गुरु बालू नाथ, जिनकी साधना में बाधा डाली गई थी। यहाँ आने वाले लोगों और स्थानीय लोगों ने कई बार अजीब आवाज़ें, परछाइयाँ और डरावने अनुभव होने की बातें बताई हैं। लेकिन कई लोग इस रोक की वजह इस दूरदराज और जंगली जानवरों से भरे इलाके में सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को मानते हैं। यहाँ कैसे पहुँचें: सड़क मार्ग से: जयपुर से 2-3 घंटे का सफ़र (NH11 या SH55 के रास्ते)।
दिल्ली: दौसा/बांदीकुई के रास्ते 4-5 घंटे की ड्राइव या रेल यात्रा। दिन के समय यहाँ घूमने जाया जा सकता है; इसके लिए कोई शुल्क नहीं लगता।
यह जगह भारत की सबसे बेहतरीन 'डार्क टूरिज़्म' साइट्स में से एक बनी हुई है। अपनी यात्रा के बारे में अच्छे से सोच-विचार कर लें और नियमों का पालन करते हुए ही यात्रा करें!




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