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वज़न कम होने के बावजूद अक्सर पेट की जिद्दी चर्बी बनी रहती है। इसका समाधान एक आसान और रेगुलर रूटीन है जिसमें कार्डियो, कोर वर्क और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शामिल हों।
ज़्यादातर दिनों में 30–40 मिनट तेज़ चलने (ब्रिस्क वॉकिंग) या ढलान पर चलने (इनक्लाइन वॉकिंग) से शुरुआत करें — इससे कैलोरी बर्न होती है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है। इसमें 10–15 मिनट की कोर एक्सरसाइज़ भी जोड़ें: जैसे प्लैंक्स, डेड बग्स, बर्ड-डॉग्स और साइड प्लैंक्स। ये पीठ के निचले हिस्से पर दबाव डाले बिना पेट की अंदरूनी मांसपेशियों को मज़बूत करते हैं।
हफ़्ते में दो बार, स्क्वैट्स, ग्लूट ब्रिजेज़ और पुश-अप्स जैसे बेसिक स्ट्रेंथ मूव्स शामिल करें। मांसपेशियां बनाने से रेस्टिंग मेटाबॉलिज़्म बढ़ता है, जिससे शरीर जमा हुई चर्बी का बेहतर इस्तेमाल कर पाता है।
प्रोग्रेसिव ओवरलोड पर ध्यान दें — यानी धीरे-धीरे समय या मुश्किल का स्तर बढ़ाएँ — और इस रूटीन के साथ सही मात्रा में प्रोटीन, नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट का भी ध्यान रखें। 'स्पॉट रिडक्शन' (शरीर के किसी एक हिस्से से चर्बी कम करना) एक मिथक है; पूरे शरीर की चर्बी कम करने और टारगेटेड मसल वर्कआउट से ही पेट का हिस्सा फ़्लैट होता है। 4–6 हफ़्ते तक लगातार इसे करने से कमर में साफ़ बदलाव दिखता है।




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