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साँस लेने की एक प्राचीन योगिक तकनीक, शीतकारी प्राणायाम को आम तौर पर "हू-हू ब्रीदिंग" के नाम से जाना जाता है। यह हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) को कंट्रोल करने के लिए साँस लेने का एक बेहतरीन योगिक अभ्यास है। यह शीतली प्राणायाम जैसा ही है, लेकिन उन लोगों के लिए ज़्यादा आसान है जो अपनी जीभ को मोड़ नहीं पाते। इस अभ्यास में मुँह को थोड़ा-सा खोलकर साँस ली जाती है, जिससे 'हिसिंग' (सी-सी जैसी) आवाज़ आती है और शरीर में ठंडक का एहसास होता है।
पिछले साल (2017) हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों पर की गई एक स्टडी में पाया गया कि शीतली और शीतकारी प्राणायाम सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर को औसतन 16.2 mm Hg तक काफ़ी कम कर सकते हैं। साथ ही, ये दिल की धड़कन को धीमा करते हैं और पैरासिम्पेथेटिक गतिविधि व दिल की धड़कन की गति में बदलाव (Heart Rate Variability) को बढ़ाते हैं।
शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास:
- सुखासन या पद्मासन में आराम से बैठ जाएँ, अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और आँखें बंद कर लें।
- अपने दाँतों को आपस में कसकर सटा लें, और अपने होठों को थोड़ा-सा खोल लें।
- गहरी साँस अंदर लें; साँस लेते समय दाँतों के बीच से हवा गुज़रने दें, जिससे एक हल्की 'हिसिंग' या "सी-सी" जैसी आवाज़ निकले।
- अपना मुँह बंद कर लें और धीरे-धीरे नाक से साँस बाहर छोड़ें।
- रोज़ाना खाली पेट 5-10 मिनट तक इसका अभ्यास करें।
सावधानियाँ: अगर आपको लो ब्लड प्रेशर, साँस लेने में तकलीफ़, या सर्दी-खाँसी की समस्या है, तो इस प्राणायाम का अभ्यास न करें। अपने डॉक्टर से सलाह लिए बिना इसे शुरू न करें, खासकर तब जब आप BP की दवाएँ ले रहे हों। एक स्वस्थ जीवनशैली और नियमित अभ्यास, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और अधिक शांत महसूस करने में मदद कर सकते हैं।




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