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अगर आप अपनी क्रेविंग के आगे हार मान लेते हैं, तो कोई भी डाइट सफल नहीं हो सकती। न्यूट्रिशन और लाइफ़स्टाइल एक्सपर्ट डॉ. मीरा शर्मा कहती हैं कि क्रेविंग और लाइफ़स्टाइल से जुड़ी आदतों के मामले में सिर्फ़ विलपावर (इच्छाशक्ति) ही काफ़ी नहीं होती।
उनके बताए छह तरीके ये हैं:
- प्रोटीन से भरपूर नाश्ता—हफ़्ते भर प्रोटीन से भरपूर नाश्ता करने से शुरुआती 4-5 घंटों में ब्लड ग्लूकोज़ लेवल कंट्रोल में रहता है, और उसके बाद क्रेविंग भी कम हो जाती है (सुबह 25-30 ग्राम प्रोटीन लें—जैसे अंडे, ग्रीक योगर्ट या पनीर)।
- समझदारी से पानी पिएं—एक तिहाई से ज़्यादा लोग प्यास और भूख में फ़र्क नहीं कर पाते। हर बार खाना खाने से पहले एक गिलास पानी पिएं, और दो बार के खाने के बीच में एक गिलास हर्बल चाय (जैसे दालचीनी या अदरक वाली चाय) पिएं।
- हर बार पेट भरकर खाएं—बिल्कुल भी भूखे न रहें। हर बार के खाने में प्रोटीन, फ़ाइबर और हेल्दी फ़ैट शामिल करें, ताकि 'घ्रेलिन' (भूख बढ़ाने वाला हॉर्मोन) का संतुलन बना रहे।
- 10 मिनट का 'माइंडफ़ुलनेस' आज़माएं—अगर अचानक बहुत ज़्यादा क्रेविंग होने लगे, तो रुकें और गहरी सांस लें या थोड़ी देर टहलें। इससे मन में उठने वाली भावनाएं शांत हो जाती हैं और क्रेविंग की तीव्रता काफ़ी हद तक कम हो जाती है।
- पूरी और अच्छी नींद लें—खराब नींद की वजह से घ्रेलिन का लेवल बढ़ जाता है और मीठा खाने की क्रेविंग ज़्यादा होने लगती है। अपनी भूख के हार्मोन्स को नैचुरली कंट्रोल करने के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद लें।
- 20 मिनट इंतज़ार करें और अपना ध्यान भटकाएँ (20-मिनट का नियम)—अगर खाने की इच्छा फिर भी बनी रहती है, तो 20 मिनट बाद कुछ अलग करने की कोशिश करें। ज़्यादातर जो खाने की इच्छाएँ उठती हैं, वे अपने आप ही खत्म हो जाती हैं, क्योंकि शरीर में ब्लड शुगर का लेवल नॉर्मल हो जाता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन स्टेप्स को फॉलो करके, कोई भी व्यक्ति इमोशनल और हार्मोनल लेवल पर खाने की इच्छाओं को 70% तक कम कर सकता है। लगातार किए गए छोटे-छोटे बदलाव, बार-बार लगने वाली भूख से लंबे समय तक आज़ादी दिलाते हैं और वज़न को सही तरीके से मैनेज करने में मदद करते हैं।




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